संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ ग्वालियर (मप्र), NIT:

गोपाल किरण समाज सेवी संस्था द्वारा मानव अधिकार पर गोष्ठी ग्वालियर के सभागार ने आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता आर.व्ही. सिंह (A.G.M – N.T.P.C,), विशेष अतिथि-डॉ. प्रवीण गौतम (एसोसिएट प्रोफेसर – गजराजा चिकित्सा महाविद्यालय), डॉ. एम. के.शर्मा (एडवोकेट -उच्च न्यायालय ग्वालियर), श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ,(गोपाल किरण समाज सेवी संस्था, ग्वालियर) के आतिथ्य में आयोजित हुई।

सर्व प्रथम जहाँआरा जी ने बैठक की उपयोगिता एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रस्ताव रखा कि संस्था इस बार सावित्री बाई फूले जी की जन्मदिवस पर कार्यक्रम आयोजित करे जिसपर उपस्थित सदस्यो ने सावित्री बाई जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला और कहा कि सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले (3 जनवरी 1831 –10 मार्च 1897) भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। देश की पहली महिला अध्यापिका व नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता भी थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं शिक्षा के कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। सावित्री बाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। भारत में नारी शिक्षा के लिये किये गये पहले प्रयास के रूप में महात्मा फुले ने अपने खेत में आम के वृक्ष के नीचे विद्यालय शुरु किया। यही स्त्री शिक्षा की सबसे पहली प्रयोगशाला भी थी।
अपने पति के साथ (ज्योतिबाफुले) मिलकर विभिन्न जातियों की छात्राओं के साथ उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्री बाई और महात्मा फुले अन्य नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। एक महिला प्रिंसिपल के लिये में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया। एक ऐसी महिला जिन्होंने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह, तथा विधवा-विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरूद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया।
महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। सभी लोगों ने उनकी जयंती 3 जनवरी के 2019 को महिला शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेते हुए नारी शिक्षा की स्थिति, चुनौतियां एवं संभावना पर संगोष्ठि का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया। इस दिन शासकीय निजी विद्यालय, महाविद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए आवेदन करने के लिए 31 दिसम्बर 2018 तक संस्था के Emai Id- gksss85_@rediffmail.com पर भेजना होगा। प्राप्त आवेदनों का निर्णय चयन समिति द्वारा लिया जाएगा। संगोष्ठी हेतु रिसर्च पेपर आमन्त्रित किया जाना सुनिचित किया गया है। आशा गौतम ,जहाँआरा को इसके लिए जिम्मेदारी दी गई और एक चयन समिति का गठन हुआ एवं जिम्मेदारियां दी गईं।
डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ, आशा गौतम, जयंत भिडे, अवनीस कुमार दुवे, एडवोकेट, तमन्ना खान, रामऔतार, नरायन निगम आदि ने भी अपने महत्व पूर्व विचार रखे। कार्यक्रम में पहुँच कर महापुरुषों की विचारधारा को समाज में स्थापित करने और समाज के ऋण (PAY BACK TO SOCIETY ) के महत्व को समझते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का वादा किया।
बैठक का संचालन आशा गौतम एवं आभार प्रदर्शन जहाँआरा ने किया।
