मकसूद अली, ब्यूरो चीफ यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

गत वर्ष यवतमाल शहर के नागरिकों को भारी जलकिल्लत का सामना करना पड़ा था। बताया गया कि यह जलकिल्लत कम बारीश की वजह से हुई थी और इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन को काफी मशक्कत भी करनी पडी थी। सौभाग्यवश इस वर्ष जिले में अच्छी बारीश हुई है और शहर को जलापूर्ती करने वाले निलोणा और चापडोह बांध में भी पर्याप्त पानी है लेकिन बढते तापमान और शहर की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए इस वर्ष भी गर्मी के मौसम में जलकिल्लत की समस्या हुई तो प्रशासन इससे किस तरह निपटेगा, इसका जबाब प्रशासन के पास नही है। शहर को पानी मुहैया कराने के लिए लाई गई अमृत योजना का भी काम रूका हुआ है। आगामी धूपकाल में पानी मुहैया होगा की नहीं इस बारे में आम जनता में काफी भ्रम है। इस को लेकर विविध चर्चाएं भी चौराहों पर होती हैं। जिला प्रशासन लोगों का संभ्रम दूर कर मुहैया पानी की जानकारी आम जनता को दे ऐसी मांग प्रहार जनशक्ती पक्ष के जिला उपाध्यक्ष बिपिन चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ती द्वारा की है।
कुछ वर्ष पहले लातुर शहर में भी जल किल्लत की समस्या पैदा हुई थी तब शहर को रेल से पानी आपुर्ती करनी पडी थी। आगामी धुपकाल को देखते हुए वहां के प्रशासन ने अभी से तैयारीयां शुरू की हैं। पानी को बेवजह बर्बाद करने वालों को दंडीत करने का निर्णय लातुर में लिया गया है लेकिन यवतमाल में ऐसी कुछ भी तैयारी नहीं दिखाई दे रही है, जिससे यह पता चल रहा है कि प्रशासन जल किल्लत को लेकर गंभीर नहीं है या फीर सब जानते हुए भी हाथ पर हाथ धरे अधिकारी एवं लोकनेता बैठे हैं, ऐसा आरोप भी चौधरी ने लगाया है।
