नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आज से सात साल पहले जामनेर शहर में 112 किमी की दीर्घायु सड़कें उखाड़कर उनकी जगह नई सड़के बनाई गईं। सड़कें उखाड़ फेंकने का कारण था 70 करोड़ रुपए का ड्रेनेज सिस्टम प्लान। ड्रेनेज सिस्टम का काम पूरा होने के बाद 50 किमी की डामरी सड़कें बनाई गईं। ड्रेनेज बनने के बाद खुली नालियों की जरूरत ख़त्म हो चुकी है। ड्रेनेज से पहले जो नालियां थीं वो बारिश का पानी बहा ले जाने के लिए सक्षम मानी जाती हैं बावजूद इसके विकास के नाम पर 66 करोड़ रुपयों का 25% कमीशन महाभक्त विकासक की जेब में और बचा पैसा गटर मे डाला जा रहा है।

जलगांव रोड के रिहायशी इलाकों मे डेढ़ फुट चौड़ी गटर बनाने के लिए जेसीबी से तीन फीट कटाव किया जा रहा है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र जहां से भाजपा के सात पार्षद आते हैं वहां तो सड़कों के काम में जबरदस्त घोटाला किया गया है। 2002 में जामनेर नगर परिषद बनने के बाद से अब तक शहर की अंदरूनी सड़कों और नालियों के निर्माण पर एक हजार करोड़ रुपए से अधिक पैसा फूंक दिया गया है।
निकायों के प्रशासक राज मे हजारों करोड़ का कमीशन घोटाला
अन्य पिछड़ा वर्ग के राजकीय आरक्षण का फैसला बीते तीन साल से सुप्रीम कोर्ट मे लंबित है। राज्य की लगभग सभी जिला परिषद, नगर पालिका, महानगर पालिकाओ के आम चुनाव नहीं हो पाए हैं। इन संस्थाओं पर प्रशासक राज है जो सीधा सरकार के नियंत्रण में है। संस्था के कामकाज को लेकर सवाल जवाब पूछने का जनता का अधिकार निलंबित कर दिया गया है। प्रशासक राज राज्य सरकार के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, करोड़ों रूपयो के विकास काम हो रहे है जो बेहद घटिया किस्म के है। ठेकेदारों से नेताओं को मिलने वाले कमीशन का प्रतिशत बढ़ाया जा चुका है। अगर इन सारे मामले की न्यायिक जांच कराई गई तो हम दावे के साथ कहते हैं कि हजारों करोड़ रुपए का घोटाला सामने आएगा।

