सद्दाम हुसैन, मोहनलालगंज/लखनऊ (यूपी), NIT:

जनपद लखनऊ के दुबग्गा से चलकर मोहनलालगंज क्षेत्र में आने वाली सिटी बस को मंगलवार को दुबग्गा डिपो की वाहन संख्या यूपी 32 एलएन 9502 में टिकट चेकिंग के दौरान तीन यात्री बिना टिकट सफर करते पाए गए थे जिस पर गंभीर भ्रष्टाचार में संलिप्त पीआरडी परिचालिका माधुरी ने बस निरीक्षण कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया था। जिसके बाद निरीक्षण कर रहे अनिल कुमार तिवारी द्वारा निरीक्षण स्थल पर वीडियो बनाए गए। भ्रष्टाचार प्रकरण उजागर न हो इस लिए महिला कर्मचारी माधुरी द्वारा बस से धक्का देने का आरोप अनिल कुमार तिवारी पर लगाया गया। निरीक्षण कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने की घटना के दौरान चालक द्वारा अपना बयान देते हुए इस बात की पुष्टि हेतु अपने हस्ताक्षर भी किए। अनुचित तरीके से चक्का जाम करके सरकारी राजस्व को कई लाख रुपये का नुकसान पहुंचाकर आमजन को परिवहन सुविधा से वंचित किया। महिला कंडक्टर भ्रष्टाचार में संलिप्त पाई गई इसलिए कोई विभागीय कार्यवाही न होने पाए इसलिए परिचालिका ने बदसलूकी सहित जातिसूचक शब्दों का प्रयोग जैसे गम्भीर आरोप लगाने लगी। जिसके बाद से यूनियन द्वारा कार्य बहिष्कार कर दिया गया था। वहीं आपको बता दें कि एक ही वाहन पर दो परिचालक टर्न के अनुसार ड्यूटी करते हैं, जिसका तुलनात्मक विवरण देखा जाये तो जिसमें माधुरी परिचालिका के न्यून प्रतिफल से प्रमाणित है कि इनकी कार्यशैली विभाग के कितनी अनुकूल है, क्या है पूरा मामला विस्तार से समझिए- दरअसल मंगलवार 4 अप्रैल को इस इलेक्ट्रिक वाहन के संविदा चालक राजकुमार एवं पीआरडी परिचालिका माधुरी द्वारा दुबग्गा से मोहनलालगंज मार्ग पर किया जा रहा था। इस दौरान समय लगभग 11 बजे पारा चौकी पर अनिल कुमार तिवारी जोकि वरिष्ठ केंद्र प्रभारी दुबग्गा डिपो हैं इनके द्वारा बस का निरीक्षण किया गया था। बस के निरीक्षण में 3 यात्री बिना टिकट मिले जिसके पश्चात पीआरडी परिचालिका माधुरी द्वारा अनिल कुमार तिवारी वरिष्ठ केंद्र प्रभारी दुबग्गा डिपो पर अभद्रता धक्का-मुक्की एवं जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया था। इस सम्बंध में बुधवार 5 अप्रैल को सिटी बस के चालक और परिचालक बुधवार को हड़ताल पर आ गए जिसकी वजह से लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, लखनऊ की 250 सिटी बसों में से सिर्फ 14 बसों का संचालन हुआ। वहीं इस सम्बंध में बुधवार 5 अप्रैल को संबंधित वाहन की वीडियो फुटेज का अवलोकन किया गया जिसमें वीडियो फुटेज के अवलोकन के समय थाना प्रभारी, दुबग्गा डिपो अधोहस्ताक्षरी, प्रबंधक संचालन, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रवर्तन, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक दुबग्गा डिपो एवं इसके अलावा कई पत्रकार साथी एवं संविदा कर्मचारी, यूनियन के पदाधिकारी राज कमल सिंह, संविदा चालक पवन गौतम, संविदा परिचालक विमल किशोर, चालक मुकेश कुमार, संविदा चालकों के साथ-साथ अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। वीडियो फुटेज का विश्लेषण अवलोकन किए जाने पर यह स्पष्ट पाया गया कि अनिल कुमार तिवारी द्वारा माधुरी से किसी भी प्रकार की अभद्रता तथा धक्का-मुक्की नहीं की गई है इसके अतिरिक्त अनिल कुमार तिवारी एवं माधुरी द्वारा घटना से संबंधित उपलब्ध कराए गए मोबाइल के वीडियो फुटेज का भी विश्लेषण व अवलोकन किए जाने पर यह स्पष्ट पाया गया कि अनिल कुमार तिवारी द्वारा निरीक्षण के समय 3 यात्री बिना टिकट मिले बिना टिकट यात्री बस में सुबह 10: 42 पर बैठे थे जबकि बस का निरीक्षण 10:56 पर किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि 14 मिनटो के अंतराल में माधुरी द्वारा यात्रियों को जानबूझकर टिकट नहीं दिया गया और खुद के बचाव में वीडियो एवं अन्य आरोप अनिल कुमार तिवारी पर लगाए गए।

यही नहीं बल्कि बस की वीडियो फुटेज एवं मोबाइल फुटेज के अवलोकन विश्लेषण से यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है कि अनिल कुमार तिवारी द्वारा माधुरी के साथ किसी भी तरह से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया था। इसके बाद उच्चाधिकारियों द्वारा समस्त संविदा चालकों परिचालकों संविदा बस संचालन हेतु अपनी रिपोर्ट स्टेशन प्रभारी व्यवस्था लिपिक को अविलंब देने की बात कही व अन्यथा की स्थिति में कठोर कार्यवाही किए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे में जहाँ लाखों लोग बस से सफर करते हैं वही यात्रियों की समस्या बढ़ती हुई नजर आ रही है। लखनऊ में करीब 250 सिटी बसों का संचालन किया जाता है जिसमें लगभग 3 लाख लोग रोजाना सफ़र करते हैं. बुधवार की स्ट्राइक की वजह से 250 बसों में से मात्र 14 बसों का ही संचालन हो पाया। जबकि 236 बसें खड़ी हुई थीं ऐसे में सिटी बसों के यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़। किसी का ऑफिस छूटा तो किसी का स्कूल कॉलेज मजबूरन लोगों को कैब और प्राइवेट ऑटो का सहारा लेकर अपने स्थान पर जाना पड़ा। वहीं यात्रियों ने बताया कि सिटी बस स्ट्राइक की वजह से कैब और ऑटो ड्राइवरों ने मनमाना किराया भी वसूल किया। महिला कंडक्टर द्वारा झूठा आरोप लगाने के कारण बुधवार को यूनियन के पदाधिकारी द्वारा कार्य बहिष्कार कर दिया गया इसके कारण सिटी बसों का संचालन नहीं हो पाने के कारण सरकारी राजस्व को लाखों रुपए की चपत लग गई।
