नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कोयले को लेकर केंद्र सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज देश के 16 राज्यों की 50 करोड़ से अधिक की आबादी 10 से 16 घंटों तक की घोषित तथा अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रही है बावजूद इसके महाराष्ट्र एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बिजली कटौती की समस्या अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रयासों और प्रशासन के परिश्रम से राज्य के सभी ऊर्जा निर्मिति केंद्रों को पूर्ण क्षमता से कार्यान्वित करने में सफलता हासिल की गई. बढ़ती गर्मी के चलते मई और जून में बिजली की मांग सबसे अधिक रहेगी. मुख्यमंत्री ने जनता और प्रशासन से यह अपील की है कि बिजली का अनावश्यक इस्तेमाल न करें, बिजली की बर्बादी से बचें. बावजूद इसके पूर्व मंत्री गिरीश महाजन के गृहनगर जामनेर में बिजली बोर्ड बिजली की बर्बादी पर आमादा है. 50 हजार की आबादी वाले इस शहर में सार्वजनिक सड़कों के दोतरफा और मुख्य सड़क के बीचोबीच खंभों पर LED लाइट्स लगाई गई है जो रात के बजाये दिनभर शुरू रहती है. जानकारी के मुताबिक ये लाइट्स डायरेक्ट मेन लाइन से कनेक्ट की गई हैं जिससे इनको बंद नहीं किया जा सकता है. वैसे किसी इलाके की स्ट्रीट लाइट के लिए उस इलाके की डीपी पर स्वतंत्र भार आंकलन मीटर दिया जाता है जिससे यह पता चलता है कि उस इलाके को रौशन करने के लिए प्रति महीना कितनी यूनिट बिजली की खपत हुई है. यहां इन लाइट्स को बंद करने का सिस्टम और मेंटेनेंस दोनों को नगर परिषद संचालित करती है और बिल भी वही पे करती है. अब जैसा कि शहर के लगभग सभी इलाकों में स्ट्रीट लाइट ऑन रहती है तो डीपीयो पर कितने मीटर शुरू हैं और कितने बंद हैं? अगर स्ट्रीट लाइट को डायरेक्ट मेन लाइन से जोड़ा गया है तो आखिर ऐसा क्यों किया गया है. इससे हजारों यूनिट्स बिजली की बर्बादी हो रही है उसके लिए कौन जिम्मेदार है? वैसे हमने एक बात कॉमन पाई है वो ये की जलगांव जिले के सभी 15 तहसीलों के प्रमुख शहरों में स्ट्रीट लाइट्स कहीं न कहीं दिनभर ऑन पाई जाती है. आम नागरिक कर्तव्य के प्रति ईमानदार होकर बिजली विभाग के दफ्तर को सूचित करता है पर कोई सुध नहीं लेता. बिजली की इस बर्बादी के पीछे बिजली के संकट को हवा देने की कोई साजिश तो नहीं है? बिजली की बर्बादी का यह सारा खेल बीते एक महीने से चल रहा है स्थानीय अखबारो ने इस पर कई बार खबरें प्रकाशित की. इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग जनता से की जा रही है ताकि पता चल सके कि बिजली की बर्बादी से सरकार को कितने करोड़ रुपयों का चूना लगाया जा रहा है और कितनी बिजली बर्बाद कर राष्ट्रीय संपत्ती का व्यय किया गया है.
