अंबेडकरवादी लेखक संघ (अलेस) व अन्य सहयोगी संगठन दशम, रिदम एवं मंतव्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम | New India Times

Edited by Ankit Tiwari, नई दिल्ली, NIT:

अंबेडकरवादी लेखक संघ (अलेस) व अन्य सहयोगी संगठन दशम, रिदम एवं मंतव्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम | New India Times

अंबेडकरवादी लेखक संघ (अलेस) व अन्य सहयोगी संगठन दशम, रिदम एवं मंतव्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम “क्रांतिकारी दलित कवि मलखान सिंह के परिनिर्वाण पर स्मृति सभा” 17 अगस्त, 2019 को गांधी पीस फ़ाउण्डेशन, पं. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग ITO, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के अवसर पर क्रांतिकारी दलित कवि मलखान सिंह के परिवार से पुत्र एवं पुत्री सहित अन्य सदस्य मौजूद रहें इसके अलावा कार्यक्रम में उपस्थित अन्य माननीय सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए जिनमें डॉ० नामदेव, डॉ० सूरज बड़त्या, डॉ० अनीता भारती, कर्मशील भारती, सुदेश तनवर, प्रो० प्रमोद मेहरा, पुष्पा विवेक, डॉ० सरोज कुमारी, डॉ० नीलम, नीतिशा खलको, अशोक बंजारा सहित अन्य माननीय सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य सदस्यों का आभार, जिन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित रह कर अपने कवि को सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।

डॉ० नामदेव ने कहा कि महाकवि बनने के लिए जो शर्ते होनी चाहिए वह सब मलखान सिंह के काव्य संग्रह में दिखाई पड़ती हैं। आगे उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं जितनी सरल सहज एवं सजीव है उनका व्यक्तित्व उतना ही सरल सहज है। वे कविता में और कविता से बाहर आम आदमी की तरह हमारे सामने आते हैं।
दलित महाकवि मलखान सिंह की पुत्री श्वेता सिंह ने कहा कि “मेरे पिता मेरे लिए पिता की तरह थे और महान व्यक्तित्व की तरह भी, ऐसे लोग समाज में बहुत कम होते हैं पर यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं ऐसे ‘आम आदमी के कवि’ की पुत्री हूं जो आम आदमी की वेदनाओं की आवाज़ प्रखर आवाज थें, वे हमारे बीच साहित्य के रूप में हमेशा जिंदा रहेंगे।”अंबेडकरवादी लेखक संघ (अलेस) व अन्य सहयोगी संगठन दशम, रिदम एवं मंतव्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम | New India Times

डॉ० सूरज बड़त्या ने कहा कि क्रांतिकारी कवि मलखान सिंह दलित साहित्य में कविता के रूप में पहले स्थान पर हैं इसके बाद ओमप्रकाश वाल्मीकि, जयप्रकाश लीलवान इत्यादि दलित कवियों का नाम लिया जा सकता है।
डॉ०अनिता भारती ने कहा कि उनका काव्य संवाद का काव्य है, वे बताते थे ‘संवाद के बिना बेहतर कविता और समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।’
अंग्रेजी विषय के प्रोफेसर प्रमोद मेहरा ने उनकी कविताओं का हिंदी अनुवाद करते समय आयी दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि महाकवि मलखान सिंह की कविताओं के शब्द अधिकतर ग्राम संस्कृति से आते हैं जिनका अनुवाद करना बेहद कठिन हो जाता है उससे भी कठिन उनमें नए अर्थ और शक्ति को अनुवाद के रूप में अभिव्यक्त करना।
डॉ० सरोज कुमारी ने क्रांतिकारी कवि मलखान सिंह को सादगी एवं सहजता का कवि कहा, वहीं सुदेश तंवर ने उन्हें जन चेतना का ककि कहा आगे उन्होंने कहा कि वे पिछड़ों, वंचितों, किसान, मजदूरों दमित स्त्रियों की आवाज थे। डॉ० नीलम ने कवि की कविताओं का वाचन करते हुए अपने अनुभव साझा किये। सामाजिक कार्यकर्ता एवं कवियत्री पुष्पा विवेक ने कवि की स्मृति में स्वरचित कविता का वाचन करते हुए अपनी कविता समर्पित की।
आदिवासी साहित्य की युवा कवयित्री नितिशा खलखो ने उन्हें अस्मिता विमर्श की वकालत करने वाले कवि के रूप में देखा। जेएनयू के शोध छात्र अशोक बंजारा ने महाकवि मलखान सिंह के काव्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि वे शब्दों, प्रतीकों और बिंबों में नया अर्थ स्थापित करने वाले जन कवि हैं।

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