जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. राजीव गुप्ता, जो गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) एवं हमीदिया अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (HOD) के रूप में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे चुके हैं, को अब गांधी मेडिकल कॉलेज का डीन बनाए जाने की मांग उठने लगी है।
करीब 40 वर्षों के अनुभव वाले डॉ. गुप्ता ने कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में न केवल मरीजों का सफल इलाज किया, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता में MBBS (गोल्ड मेडलिस्ट, 1985), MD (मेडिसिन, 1989) — गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल, तथा DM (कार्डियोलॉजी, 1995) — AIIMS, नई दिल्ली शामिल हैं।

गरीब मरीजों के लिए समर्पित सेवा
डॉ. गुप्ता की पहचान एक ऐसे चिकित्सक के रूप में रही है, जिन्होंने सरकारी अस्पताल में गरीब और आम लोगों को बेहतर एवं निःशुल्क हृदय जांच और इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया। ECG, Echo, Angiography जैसी सुविधाओं को सुलभ बनाने में उनका योगदान सराहनीय रहा है।
पारिवारिक सेवा की परंपरा
उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से भोपाल के मंगलवारा क्षेत्र स्थित पैतृक निवास (27, मंगलवारा, नगर निगम भवन के सामने) से लोगों की सेवा करता आ रहा है। इसके अलावा अरेरा कॉलोनी में भी उनका परामर्श केंद्र संचालित रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व्यक्तित्व
डॉ. गुप्ता को उनके शोध, शिक्षण और चिकित्सा सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें
यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड (1992)
ऑस्टिन डॉयल ओरेशन (2008)
एक्सीलेंस इन कार्डियोलॉजी अवॉर्ड (2010)
एम.सी. गुप्ता ओरेशन (2011)
IMA नेशनल वेटरन एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड (2024) प्रमुख हैं।
उन्होंने 110 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित किए हैं और प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डीन बनाने की उठी मांग
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि यदि डॉ. राजीव गुप्ता को गांधी मेडिकल कॉलेज का डीन बनाया जाता है, तो मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार संभव है। उनके अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और सेवा भावना से चिकित्सा शिक्षा एवं मरीजों की सुविधाओं में गुणात्मक परिवर्तन आ सकता है।
निष्कर्ष:
डॉ. राजीव गुप्ता का अब तक का कार्यकाल यह दर्शाता है कि वे न केवल एक कुशल चिकित्सक और शिक्षक हैं, बल्कि एक सक्षम प्रशासक भी साबित हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें डीन पद की जिम्मेदारी सौंपना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

