ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, व्यापार नीति में बड़ा बदलाव | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, व्यापार नीति में बड़ा बदलाव | New India Times

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (20 फरवरी 2026 को) राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आपातकालीन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून आयात को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने जैसी आर्थिक शक्तियां कांग्रेस के पास हैं।

प्रभावित टैरिफ:
ये टैरिफ चीन (145% तक), भारत और ब्राजील (50% तक), मैक्सिको, कनाडा आदि देशों से आयात पर लगाए गए थे। कुल 134 अरब डॉलर से अधिक टैरिफ इकट्ठा हो चुके हैं, जो 3 लाख से ज्यादा आयातकों से वसूले गए।

क्या अमेरिका दुनिया भर के टैरिफ वापस करेगा?
टैरिफ हटाना: हां, कोर्ट के फैसले के अनुसार ये टैरिफ अब वैध नहीं हैं और इन्हें हटा दिया जाएगा। यह अमेरिकी व्यापार नीति पर बड़ा असर डालेगा, क्योंकि इससे वैश्विक आयात पर लगे ये बोझ कम होंगे। हालांकि, तत्काल हटाने की प्रक्रिया प्रशासन पर निर्भर करेगी।

रिफंड (वापसी): अभी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने रिफंड पर कुछ नहीं कहा, जो निचली अदालतों में तय होगा। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसॉम ने तुरंत रिफंड चेक जारी करने की मांग की है, लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।

भविष्य में क्या?
ट्रंप ने वैकल्पिक तरीके सुझाए हैं, जैसे 10% वैश्विक टैरिफ, लेकिन वे भी कांग्रेस की मंजूरी या सीमित कानूनों (जैसे ट्रेड एक्ट के तहत 15% तक 150 दिनों के लिए) पर निर्भर होंगे। यह फैसला राष्ट्रपति की व्यापार शक्तियों पर लगाम लगाता है।
अगर आपको और डिटेल्स चाहिए, जैसे किसी खास देश पर असर, तो बताएं!भारत पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण रहा है, खासकर ट्रंप प्रशासन के दौरान 2025-2026 में लगाए गए टैरिफ के संदर्भ में।

सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2026 के फैसले ने स्थिति को बदल दिया है। यहां मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति:
पहले क्या था (सुप्रीम कोर्ट फैसले से पहले):
ट्रंप ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत व्यापक “reciprocal” और “punitive” टैरिफ लगाए थे।
भारत पर शुरू में 50% तक टैरिफ (reciprocal + Russian oil imports के लिए अतिरिक्त 25%) लगाए गए थे।

फरवरी 2026 की शुरुआत में US-India के बीच अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क/डील हुई, जिसमें:
भारत ने Russian oil खरीदना बंद करने का वादा किया।
US ने भारत पर टैरिफ 18% तक कम किया (textiles, apparel, pharmaceuticals, gems, diamonds आदि प्रमुख निर्यात पर)।
कुछ सेक्टर (जैसे generic drugs, aircraft parts) पर टैरिफ हटाने की बात हुई।
भारत ने US से industrial goods, agriculture products आदि पर टैरिफ कम करने का वादा किया।
भारत के प्रमुख निर्यात (textiles, pharma, gems, leather) पर यह बोझ था, जिससे US में भारतीय उत्पाद महंगे हो गए थे और निर्यात प्रभावित हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट फैसले का प्रभाव (20 फरवरी 2026):
कोर्ट ने 6-3 से फैसला दिया कि IEEPA के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है — यह कांग्रेस की शक्ति है।
इससे ट्रंप के sweeping/emergency/reciprocal टैरिफ (भारत सहित सभी देशों पर) अवैध घोषित हो गए।
भारत पर पहले के उच्च टैरिफ (18% या उससे ज्यादा) का कानूनी आधार खत्म हो गया।
ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया में नया 10% global tariff लगाया (Section 122 या अन्य कानून के तहत, 150 दिनों के लिए), जो सभी देशों पर लागू है (कुछ exemptions के साथ)।
भारत के लिए अब प्रभावी टैरिफ 10% हो गया है (18% से कम), हालांकि यह अस्थायी है और कुछ सेक्टरों में exemptions हैं।
भारत सरकार (Commerce Ministry) ने कहा है कि वे इस फैसले के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

भारत पर कुल प्रभाव:
सकारात्मक:
टैरिफ 50% → 18% → अब 10% तक कम हुआ → भारतीय निर्यात (textiles, pharma, gems आदि) US में सस्ते होंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
निर्यात बढ़ने की संभावना, खासकर textiles और pharma सेक्टर में (CITI जैसे संगठनों ने कहा कि भारत अच्छी स्थिति में है)।
Russian oil penalties हटने से भारत को राहत।

नकारात्मक/अनिश्चितता:
नया 10% global tariff अभी भी लागू है, जो पहले के MFN rate (लगभग 3.5%) से ज्यादा है।
रिफंड की संभावना (अगर importers क्लेम करें) लेकिन यह निचली अदालतों में तय होगा।
ट्रेड डील की आगे की बातचीत प्रभावित हो सकती है — भारत US के साथ BTA (Bilateral Trade Agreement) पर बात कर रहा है।
वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है, जो सप्लाई चेन और कीमतों पर असर डाल सकती है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत के लिए राहतभरा रहा है क्योंकि उच्च टैरिफ हट गए और अब 10% पर आ गया है, लेकिन ट्रंप की नई नीतियां अनिश्चितता बरकरार रखती हैं। अगर US-India ट्रेड डील आगे बढ़ी तो और बेहतर हो सकता है।

भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर (खासकर जेनेरिक दवाओं) पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव अब काफी सकारात्मक और राहत देने वाला है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2026 के फैसले और उसके बाद की घटनाओं ने स्थिति बदल दी है।

यहां विस्तार से समझते हैं:
पहले की स्थिति (सुप्रीम कोर्ट फैसले से पहले):
ट्रंप प्रशासन ने IEEPA के तहत reciprocal और punitive टैरिफ लगाए थे, जिसमें भारत पर 25-50% तक टैरिफ थे (Russian oil imports के कारण अतिरिक्त पेनल्टी)।

फरवरी 2026 की शुरुआत में US-India Interim Trade Framework/Deal हुई:
भारत ने Russian oil खरीदना बंद करने का वादा किया।
US ने भारत के कई निर्यात पर टैरिफ कम किए, जिसमें generic pharmaceuticals और pharmaceutical ingredients को 0% टैरिफ (या पूरी तरह exempt) करने की बात शामिल थी।

यह exemptions gems, diamonds, aircraft parts आदि के साथ थी, लेकिन pharma पर Section 232 (national security) जांच चल रही थी, जिससे भविष्य में 100% तक टैरिफ की धमकी थी (branded/patented drugs पर)।

भारतीय pharma का US में बड़ा हिस्सा (US की ~40% generic drugs भारत से आती हैं) प्रभावित हो सकता था, क्योंकि उच्च टैरिफ से कीमतें बढ़तीं और निर्यात घटता।
सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद (20 फरवरी 2026):

कोर्ट ने IEEPA के तहत टैरिफ को अवैध बताया → reciprocal/punitive टैरिफ (भारत सहित) खत्म।
ट्रंप ने तुरंत Section 122 (Trade Act 1974) के तहत नया 10% global tariff लगाया (24 फरवरी 2026 से प्रभावी, 150 दिनों के लिए)।

लेकिन महत्वपूर्ण: इस नए 10% टैरिफ में pharmaceuticals और pharmaceutical ingredients को स्पष्ट रूप से exempt किया गया है।
White House proclamation में exemptions में शामिल: pharmaceuticals and pharmaceutical ingredients, certain critical minerals, energy products, कुछ agricultural items आदि।
इसका मतलब है कि भारतीय generic drugs और APIs (Active Pharmaceutical Ingredients) पर अब कोई अतिरिक्त 10% टैरिफ नहीं लगेगा।

पहले के reciprocal टैरिफ (18% तक कम हुए थे) भी अब invalid हैं, और pharma पहले से ही exemptions में था → कुल मिलाकर भारतीय pharma पर US में प्रभावी टैरिफ लगभग 0% या बहुत कम (केवल standard MFN rate, जो pharma के लिए आमतौर पर नगण्य है) रह गया है।

भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर पर कुल प्रभाव:
सकारात्मक प्रभाव:
निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना: US दुनिया का सबसे बड़ा pharma बाजार है, और भारत से ~40% generics आती हैं। टैरिफ हटने से भारतीय कंपनियां (जैसे Sun Pharma, Dr. Reddy’s, Cipla, Lupin आदि) अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी।

कीमतें स्थिर/कम: US में दवाओं की लागत नहीं बढ़ेगी, जो भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद।
Section 232 जांच का असर कम: नए टैरिफ में pharma exempt है, और पहले के punitive टैरिफ खत्म → जांच का परिणाम भी कम प्रभावी।
कुल भारतीय निर्यात में pharma का हिस्सा बड़ा (~10-15% US को), तो यह सेक्टर सबसे ज्यादा लाभान्वित होगा।

संभावित चुनौतियां/अनिश्चितता:
150 दिनों बाद (जुलाई 2026 तक) 10% टैरिफ खत्म हो सकता है या बढ़ सकता है, लेकिन exemptions बने रहने की उम्मीद।
अगर Section 232 जांच से pharma पर कोई नया national security टैरिफ आया, तो प्रभाव पड़ सकता है (लेकिन फिलहाल exempt)।
US-India Bilateral Trade Agreement (BTA) की आगे की बातचीत जारी है, जिसमें pharma पर और बेहतर डील हो सकती है।

रिफंड: पहले के टैरिफ पर importers क्लेम कर सकते हैं, जो भारतीय कंपनियों को अप्रत्यक्ष फायदा देगा।
कुल मिलाकर, फार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए यह बड़ी राहत है — उच्च टैरिफ खत्म हो गए, exemptions बने रहे, और निर्यात बढ़ने की मजबूत संभावना है। भारतीय pharma इंडस्ट्री (जिसमें Bhopal जैसे क्षेत्रों में भी यूनिट्स हैं) के लिए अच्छी ख़बर।
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