जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में आधुनिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में भी सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाने जा रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही 114 किलोमीटर लंबी यह फोरलेन ग्रीनफील्ड परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नया आयाम देगी। इसके पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और लंबी दूरी के वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति देगी।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
शहर में बढ़ते यातायात दबाव के चलते जाम और समय की बर्बादी बड़ी समस्या बन चुकी थी। आउटर रिंग रोड बनने से भारी वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी और यात्रा समय कम होगा।
पांच पैकेज में निर्माण कार्य
परियोजना को पांच पैकेजों में विभाजित किया गया है, जिनमें बरेला-मानेगांव, मानेगांव-एनएच-45, एनएच-45-कुशनेर, कुशनेर-अमझर और अमझर-बरेला खंड शामिल हैं। चरणबद्ध तरीके से इसके हिस्से इस वर्ष और अगले वर्ष तक शुरू किए जाएंगे।
किसानों और व्यापार को फायदा
रिंग रोड के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी। परिवहन समय और लागत में कमी आएगी, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। साथ ही मालवाहक वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक प्रभावी बनेगा।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
भेड़ाघाट, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा तट और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
नर्मदा पर बनेगा आधुनिक पुल
परियोजना के तहत नर्मदा नदी पर लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज बनाया जा रहा है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण होगा और क्षेत्र की नई पहचान बनेगा।
व्यापक अधोसंरचना विकास
इस परियोजना में 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडरपास, 23 लाइट व्हीकल अंडरपास सहित सैकड़ों संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जो भविष्य की यातायात जरूरतों को पूरा करेंगी।
हरित विकास पर भी जोर
निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही पौधरोपण और हरित पट्टी विकसित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नया विकास अध्याय
जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महज सड़क निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का आधार बन रही है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, मजबूत लॉजिस्टिक्स और रोजगार सृजन के साथ यह परियोजना मध्य भारत के विकास मानचित्र पर नई पहचान स्थापित करेगी।

