कोरोना के लक्षण मिलते ही जांच करवायें ताकि समय पर उपचार मिलने से अमूल्य जीवन बच सके: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

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हरकिशन भारद्वाज, ब्यूरो चीफ, सवाई माधोपुर (राजस्थान), NIT:

गत 28 सितम्बर को राज्य में 2211 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये थे जो तब तक का रिकॉर्ड था। इसके बाद मास्क लगाने के सम्बंध में आई जनजागरूकता से संक्रमण लगातार कम होता गया लेकिन गत 15 दिन में इसमें काफी वृद्धि हुई है जिसमें दीपावली के अवसर पर बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना, बढ़ती सर्दी की मुख्य भूमिका रही। गत गुरूवार को 2549 कोरोना पॉजिटिव सामने आये जिसने 28 सितम्बर का रिकार्ड तोड़ दिया है।
इन तथ्यों से चिन्तित मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कोरोना संक्रमण के रोकथाम, जॉंच, उपचार, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता के सम्बंध में वीसी के माध्यम से समीक्षा की। इसका मुख्य एजेंडा निजी अस्पतालों और सरकारी चिकित्सा संस्थानों में बेहतर समन्वय रहा।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने बताया कि दुनिया के कई देशों में हालात बेकाबू हो गये हैं। वैक्सीन और दवा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, वायरस कब ज्यादा खरतनाक हो जाये इसका भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हमने स्वास्थ्य ढॉंचें को काफी बेहतर किया है लेकिन बचाव ही श्रेष्ठ विकल्प है क्योंकि सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्धता, आईसीयू बेड, वेंटिलेटर आदि सुविधाओं को तो बढ़ा सकते हैं, चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ को एक हद से ज्यादा बढाया नहीं जा सकता। उन्होंने निजी अस्पताल प्रंबधन से अपील की कि आपदा की इस घड़ी में एक-एक व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिये भरसक प्रयास करें, राज्य सरकार से जो भी सहयोग चाहिये हम देंगे।
श्री अशोक गहलोत ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति मास्क लगाये, कोरोना के लक्षण मिलते ही जॉंच करवा लें। समय पर जॉंच से रोगी को समय पर उपचार उपलब्ध हो जाता है और उसकी जान बचने की सम्भावना बढ़ जाती है साथ ही वह व्यक्ति अधिक लोगों को संक्रमित नहीं कर पाता। उन्होंने बताया कि कोरोना गांव-शहर, जाति-धर्म नहीं देखता। ग्रामीण क्षेत्र में भी काफी लोग कोरोना से काल कलवित हुये हैं लेकिन कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना नहीं है जो गलत है। उन्होंने पटाखा बैन की पूर्ण पालना के लिये राज्य के आमजन की प्रशंषा भी की।
मुख्यमंत्री महोदय ने राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ सांइसेंस के कुलपति डॉ. राजाबाबू पंवार, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी, राजस्थान हॉस्पिटल के डॉ. वीरेन्द्र सिंह, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर के डॉ. एम.एल स्वर्णकार, ईटरनल अस्पताल के डॉ. भवानी, सीके बिडला अस्पताल के डॉ. अशोक, श्रीराम हॉस्पिटल, जोधपुर के डॉ. चांडक, जोधपुर के ही डॉ. महेश, कोटा हार्ट इंस्टिट्यूट के डॉ. राकेश जिन्दल, फॉर्टिस जयपुर के डॉ. स्वामी, नारायना की डॉ. माला समेत अलवर, बीकानेर सहित राज्यभर में संचालित निजी अस्पतालों के संचालकों, सम्भागीय आयुक्त, कलेक्टर से फीडबैक लिया तथा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में बेहतर समन्वय के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने बताया कि हाल ही में 2 हजार चिकित्सकों की भर्ती की गई है। कम्युनिटी हैल्थ ऑफिसर के पदों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने पर कोरोना से लडाई में हमें सहायता मिलेगी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि 100 से अधिक बेड वाले निजी अस्पतालों में 40 प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिये आरक्षित रखने के निर्देश दिये गये हैं। राज्य में अभी 20168 एक्टिव केस हैं तथा मृत्यु दर 0.9 प्रतिशत है जो देश की मृत्यु दर 1.45 प्रतिशत से बहुत कम है लेकिन पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण बढा है जो चिन्ता की बात है। निजी अस्पतालों से समन्वय के लिये नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। कोरोना वार्ड में कितने खाली बेड हैं, इसकी सूचना अस्पताल की हैल्प डेस्क पर डिस्प्ले होना सुनिश्चित करें ताकि एक-एक बेड का पूर्ण उपयोग हो सके। वीसी में चिकित्सा शिक्षा के शासन सचिव वैभव गालरिया, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के आयुक्त महेन्द्र सोनी भी उपस्थित रहे।
कलेक्ट्रेट के राजीव गांधी सेवा केन्द्र के वीसी रूम मंे उपस्थित रह कर जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिया, जिला परिषद सीईओ सुरेश कुमार, सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीणा, जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. बीएल मीणा, रिया हॉस्पिटल गंगापुर सिटी के डॉ. महेन्द्र, रणथम्भौर सेविका हॉस्पिटल के डॉ. अभिमन्यु ने वीसी में भाग लिया। वीसी के बाद जिला कलेक्टर ने इन सभी की बैठक ली तथा कोरोना सैम्पलिंग बढाने के निर्देश दिये । उन्होंने रिया हॉस्पिटल तथा रणथम्भौर सेविका हॉस्पिटल में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी ली तथा नोडल अधिकारी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।
फोटो केप्शन:- 20 पीआरओ 5 वीसी के माध्यम से राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा करते मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत।

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