पुलिस और आबकारी विभाग के संरक्षण में फल फूल रहा है गांजे का अवैध कारोबार

अपराध, देश, भ्रष्टाचार, राज्य

गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

फाइल फोटो

अवैध रूप से भांग की दुकान में गांजा की बिक्री रोकन के लिए हाईकोर्ट के दिए हुए निर्देश की प्रदेश और खासकर अंबेडकर नगर जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव एवं आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश को आदेश दिया था कि वह गांजे की बिक्री पर रोक लगाएं मगर उसके बावजूद भी अभी तक भांग बेचने के लाइसेंस के बहाने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में गाजा की भी बिक्री अवैध रूप से की जा रही है।
जिले की 90% दुकान भांग की हैं और बिक्री गांजा की हो रही है। यह खेल इस जिले में भी फल-फूल रहा है।
मीडिया टीम ने जब इस गोरखधंधे की पड़ताल की तो आबकारी और पुलिस की मिलीभगत की पोल खुल गई।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में आवंटित भांग की दुकानों की आड़ में प्रतिबंधित मादक पदार्थो की बिक्री का खेल खुलेआम हो रहा है।
दुकान पर पहुंचते ही दुकानदार या उसके आसपास मंडराने वाला शख्स यही पूछता है कि क्या चाहिए। इशारा साफ रहता है, उपभोक्ता को केवल ‘खट्टी मीठी’ कहने की जरूरत है और फिर पुड़िया हाजिर।
भांग की दुकानों पर गांजा बिकने की एक और पुष्टि इस तथ्य से होती है कि हाल ही में जिले की पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने गांजा तस्कर को पकड़ा था। तस्करों ने भी भांग की दुकानों पर गांजा सप्लाई की बात कही थी। तमाम दुकानें ऐसी भी हैं जहां से भांग की लाइसेंस फीस भी नहीं निकल पाती। लिहाजा वहां का ठेकेदार गांजा बिक्री की राह पर चल पड़ता है। मजेदार बात यह भी है कि आबकारी नियम के अनुसार कोई भी भांग की दुकान गुमटी में नहीं चलनी चाहिए किंतु करीब 75 से 80 फीसदी दुकान गुमटियों में ही चल रही हैं। कई स्थानों पर तो फुटपाथ पर ही भांग बेची जा रही है। जहां किसी तरह का कोई बोर्ड नहीं लगा है। ऐसे में तमाम अनुज्ञापी आबकारी विभाग के नियमों को दरकिनार कर अपनी ‘दुकान’ चला रहे हैं।

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