मीरा-भाईंदर मनपा के मनोनीत 5 नगरसेवकों का पद खतरे में, बाम्बे हाईकोर्ट ने नगरविकास मंत्री को जारी किया नोटिस | New India Times

साबिर खान, मीरा-भाईंदर/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

मीरा-भाईंदर मनपा के मनोनीत 5 नगरसेवकों का पद खतरे में, बाम्बे हाईकोर्ट ने नगरविकास मंत्री को जारी किया नोटिस | New India Times

मुंबई हाईकोर्ट ने मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के 5 मनोनीत नगरसेवक के अवैध तरीके से हुए चयन के मामले में राज्य सरकार के नगरविकास मंत्री समेत सभी को नोटीस जारी कर तीन सप्ताह के अंदर अपना पक्ष रखने के आदेश दिये हैं। जिससे उन 5 मनोनीत नगरसेवकों का पद खतरे में पडते हुए उनके नगरसेवक पद रद्द होने की संभावना जताई जा रही है। ज्ञात हो कि मीरा भाईंदर के जागरूक नागरीक नितेश मुणगेकर ने मीरा भाईंदर महानगरपालिका में गैरकानुनी तरीके से नियमों को ताक पर रखकर चयन किये गये 5 मनोनीत नगरसेवकों की नियुक्ती पर मुंबई हाईकोर्ट में रिट पिटीशन 5334/2021 याचिका अगस्त महीने में दायर की थी जिसकी सुनवाई मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस श्री ए ए सैय्यद व श्री एस जी दिघे की खंडपीठ में शुक्रवार 3 दिसंबर को हुई। मुंबई हाईकोर्ट में दायर याचिका में श्री मुणगेकर ने कहा है कि महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम 1949 मनोनीत नगरसेवक अधिनियम 2012 की धारा 4 के अनुसार मनपा कार्यक्षेत्र में करीबन 5 साल से अधिक कार्यरत रहने वाले प्रोफेसर, इंजिनियर, डॅाक्टर, ॲडवोकेट, सीए, मनपा उपआयुक्त, कला, क्रिडा समाजसेवा से एनजीओ का पदाधिकारी आदि विभिन्न 7 गैरराजनितिक क्षेत्रों में एक एक ऐसे 5 लोगों को मनोनीत नगरसेवक नियुक्त करना चाहिए ताकि उनके अनुभव व ज्ञान का फायदा मनपा प्रशासन को हो सके लेकिन मनपा में सत्ताधारी भाजपा ने राजनितिक दबाव डालकर नियमों को नजरअंदाज करते हुए संबंधित विभागों से जाच पडताल किये बिना मनोनीत नगरसेवक का चयन गैरकानुनी ढंग से किया है और जहां एनजीओ से एक मनोनीत नगरसेवक लेना चाहिए वहाँ 3 नगरसेवक चॅरिटी कमिशनर से जांच पडताल किये बिना लिये गये हैं। एक एडवोकेट हैं जो वकालत नहीं कर रहे हैं और दूसरा पूर्व मनपा अधिकारी जो कि उपआयुक्त पद पर रहा नहीं है। इस संदर्भ में सामाजिक कार्यकर्ता रोहित सुवर्णा, विधायक गिता जैन समेत कई अन्य लोगों ने मनपा आयुक्त के पास लिखित रूप में शिकायतें दर्ज करके मनोनीत नगरसेवक की गैरकानुनी चयन प्रक्रिया रद्द करते हुए नये तरीके से चयन प्रक्रिया कानून के मुताबिक जांच पडताल करते हुए करने की मांग की थी लेकिन तत्कालीन मनपा आयुक्त ने राजनितिक दबाव में आकर काम किया था। बता दें कि सुप्रिम कोर्ट ने महाराष्ट्र के नगरविकास मंत्री को आदेश दिया था कि सुनवाई लेते समय याचिकाकर्ता श्री मुणगेकर द्वारा कानून के मुताबिक चयन प्रक्रिया कराने के मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए निर्णय करें लेकिन नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कानून के मुद्दे को नजरअंदाज करते हुए सुप्रिम कोर्ट के आदेश के विपरीत निर्णय देकर 5 मनोनीत नगरसेवकों की नियुक्ती करने का फैसला सुनाया।जिसमें एनजीओ के तीन विक्रम प्रताप (शिवसेना), अनिल भोसले व भगवती वर्मा (भाजपा) एड एस ए खान (कांग्रेस) व अजित पाटील (भाजपा) मनोनीत नगरसेवक शामिल हैं। मुंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य सरकार के नगरविकास मंत्री समेत 5 मनोनीत नगरसेवक को नोटीस जारी करते हुए तीन सप्ताह में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनोनीत नगरसेवकों के पद पर तलवार लटकती हुई दिखाई दे रही है।

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