लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने के अपना रहे हैं नए-नए तरीके, कोई फर्जी आई कार्ड तो कोई गाड़ी पर मेडिकल स्टाफ का चिपका रहे हैं पर्चा

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यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

कोरोना महामारी दौर में लॉकडाउन में कुछ मेडिकल डिपार्टमेंट एवं कुछ सरकारी डिपार्टमेंट के लोग एवं कुछ मीडिया कर्मी बिना वजह कुछ रुपए लेकर लोगों के आई कार्ड बनाकर दे रहे हैं जिससे लॉकडाउन में लगी पाबंदी में लोग घरों से बाहर की सेर कर सकें. लोग तरह तरह के इंतजाम बना कर घर से बाहर निकल रहे हैं जैसे कि फर्जी आईकार्ड. देखा गया है कि लोगों ने आई कार्ड गले मे डाला हुआ है तो कोई प्रशासन भी नहीं रुकता तो वह फर्जी आई कार्ड बनवा लेते हैं और देखते हैं कि मेडिकल वालों की गाड़ियों को कोई नहीं रोकता तो वह गाड़ियों पर मेडिकल स्टाफ का पर्चा चिपका कर बाजारों में भी बिना वजह घूमते रहते हैं जोकि यह जिला प्रशासन की अनदेखी की शिकायत है जो इन पर कोई रोक टोक नहीं करती ना ही इन पर कोई कार्रवाई करती और नहीं इन की कोई जांच करता कि यह आई कार्ड फर्जी है या असली इसका किसी को कोई पता नहीं और ना जाने जिले में कितने ऐसे फर्जी कार्ड बनाकर लोग सरेआम जिले में लगे लॉकडाउन को तार तार कर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और जिला प्रशासन खुद सुस्त पड़ा हुआ है जोकि लोग घर से बाहर निकल सके और आ जा सके जोकि आई कार्ड सिर्फ पैसे देकर यह बनाए गए हैं. लॉकडाउन तक के लिए उसके बाद यह आई कार्ड किसी भी आम लोगों पर नजर नहीं आते ये प्रशासन की अनदेखी शिकायत है जोकि फर्जी रूप से आई कार्ड बनवाकर आम लोग बेवजह बाजारों में घूमते रहते हैं. अगर कोई उन्हें रोकता है तो वह अपना फर्जी आई कार्ड दिखा कर बाजारों में घूमते रहते हैं और अपनी दबंगई दिखाते रहते हैं. लोगों को ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त किए जाएं आई कार्ड उन्हीं को बाजारों में निकाला दिया जाए क्योंकि आई कार्ड लेकर घूम रहे पढ़ने वाले और अनपढ़ भी आई कार्ड को गले में डाल कर बाजारों की सेर कर रहे हैं और लॉक डाउन का उल्लंघन कर रहे हैं.

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