राजस्थान में निर्दलीय विधायकों की ताकत शामिल कर कांग्रेस लोकसभा चुनावों में बाजी मारने की तरफ बढा रही है कदम | New India Times

अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान में निर्दलीय विधायकों की ताकत शामिल कर कांग्रेस लोकसभा चुनावों में बाजी मारने की तरफ बढा रही है कदम | New India Timesराजस्थान में बहुमत से एक कम विधायक का आंकड़ा पाने वाली कांग्रेस ने बसपा के 6 विधायकों सहित 11 कांग्रेस के व दो भाजपा के बागी बनकर चुनाव जीतने वाले विधायकों के समर्थन के बल पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद अब लोकसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देकर विजय परचम लहराने के लिये प्रभारी महामंत्री अविनाश पांडे ने जयपुर में एक होटल में उन सभी 13 विधायकों से करीब एक घंटा बैठक करके आगामी रणनीति पर विचार विमर्श किया है।
हालांकि राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों के प्रमुख कार्यकर्ताओं, विधायकों व वरिष्ठ नेताओं से 16 से 20 जनवरी तक अलग अलग दिन अलग अलग लोकसभा क्षेत्रवार जयपुर में मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट व प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे ने बैठक करके रायशुमारी व मंथन कर लिया है। लेकिन सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को पार्टी नीति अनुसार वहां उन बैठकों में साथ ना बुलाकर अब अलग से मंत्रणा करके नये तरिके से रुपरेखा बनाई जा रही है।
राजस्थान के प्रभारी महामंत्री अविनाश पांडे के साथ बैठक में ग्यारह कांग्रेस के दो भाजपा के बागी होकर चुनाव लड़कर विधायक बनने वालों में राजकुमार गौड़, महादेव सिंह, सयंम लोढा, बाबूलाल नागर, रामकेश मीणा, लक्षमण मीणा, आलोक बेनीवाल, सुखवीर सिंह, बलजीत यादव, ओमप्रकाश हूड़ला व सुरेश टांक थे। इन विधायकों के साथ हुई बैठक के बाद प्रभारी महामंत्री पाण्डे ने कहा कि सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक मिलना चाहते थे तो यह मुलाकात इसी कड़ी में होने के बाद लोकसभा चुनाव में यह सभी विधायक कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के लिये पूरी कोशिशे करेंगे।
28-जनवरी को अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर हो रहे चुनाव में अगर कांग्रेस जीतती भी है तो कुल 200 सीट में बहुमत से एक कम ही सीट कांग्रेस की होगी। उस स्थिति में सरकार के स्थायित्व के लिये भी जरुरी है कि बहुमत से कुछ विधायक अपने पक्ष में बनाये रखने के लिये निर्दलीय विधायकों का समर्थन बनाया रखना आवश्यक है। दूसरी तरफ दो माह बाद होने वाले लोकसभा चुनाव मे भी सभी निर्दलीय विधायकों के समर्थन व सहयोग से अधिका अधिक सीट कांग्रेस जीतने के लिये उनके सुझावों को तरजीह व उनसे बातचीत का सीलसीला बनाये रखने में कांग्रेस नेता कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते हैं।

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