वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब मरीजों को किस हद तक उपेक्षा झेलनी पड़ती है, इसकी बानगी मोहम्मदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ देखने को मिलती है। यहां न डॉक्टर संवेदनशील हैं न व्यवस्था चौकस। मरीजों को फटकार गंदगी और लापरवाह सिस्टम का सामना करना पड़ रहा है। महिला डॉक्टरों का व्यवहार जहां रौबदार और बेरुखा है वहीं स्वास्थ्य केंद्र परिसर गंदगी से अटा पड़ा है। बरवर क्षेत्र के रहने वाले पत्रकार राम लखन सिंह अपनी पत्नी को इलाज के लिए मोहम्मदी सीएचसी लाए थे लेकिन वहां मौजूद महिला डॉक्टर के व्यवहार ने उन्हें असहज कर दिया।
राम लखन सिंह का कहना है कि जैसे ही उन्होंने अपनी पत्नी की तबीयत से संबंधित समस्या बताने की कोशिश की डॉक्टर ने उन्हें डांटते हुए कहा यह मेरी कुर्सी है मैं जा रही हूं घर और उन्हें बाहर जाने को कह दिया। राम लखन सिंह का आरोप है कि डॉक्टर ने बिना ठीक से जांच किए वही दवाएं दोबारा लिख दीं जो पहले दी जा चुकी थी। मरीज की समस्या को न तो ध्यान से सुना गया, न ही कोई नई सलाह दी गई।इस तरह की लापरवाही और बेरुखे व्यवहार को लेकर आमजन में नाराजगी है।
महिला मरीजों और तीमारदारों से बर्ताव में भी लापरवाही
स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद महिला डॉक्टरों पर आरोप है कि वे किसी भी मरीज या उनके साथ आए परिजनों से ढंग से बात नहीं करतीं।यदि कोई तीमारदार मरीज के लिए कुछ कहने की कोशिश करता है, तो उन्हें डांटकर बाहर कर दिया जाता है।यह स्थिति खासकर उन गरीब मरीजों के लिए बेहद कष्टकारी हो जाती है जो सुबह से लाइन में लगे रहते हैं।
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में गंदगी का अंबार
मोहम्मदी सीएचसी की बदहाल स्थिति की पोल परिसर की गंदगी खुद बयां कर रही है।मरीजों और उनके परिजनों को खुले में खड़े होने तक में परेशानी होती है। कूड़े-कचरे का अंबार मुख्य द्वार के पास जमा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र के आसपास की तस्वीरें यह स्पष्ट करती हैं कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।एक तरफ जहां सूबे के मुखिया और देश के प्रधानमंत्री स्वयं झाड़ू लेकर स्वच्छता अभियान के लिए संदेश दे रहे हैं वहीं परिसर में फैली गंदगी मरीजों को और बीमार कर रहीं हैं।
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे फर्जी अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग मौन
मोहम्मदी क्षेत्र में कई ऐसे प्राइवेट अस्पताल संचालित हो रहे हैं जिनके पास न तो एमबीबीएस डॉक्टर हैं और न ही कोई वैध रजिस्ट्रेशन।इसके बावजूद इन अस्पतालों में गंभीर प्रक्रियाएं जैसे डिलीवरी आदि,धड़ल्ले से की जा रही हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है, लेकिन सीएचसी अधीक्षक व अन्य जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।न तो निरीक्षण होता है न ही कोई कार्रवाई।फिलहाल पीड़ित राम लखन ने अपनी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराकर कार्यवाही की मांग की है।
CMO से संपर्क किया गया, जवाब गोलमोल
जब इस पूरे मामले में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनके पी आर ओ ने फोन उठाकर सिर्फ इतना कहा, “मैं अभी बात करा रहा हूं,” और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला स्तर पर भी लापरवाही बरती जा रही है।
