हाल-ए-भोपाल: सड़कें ब्लैक आउट, भोपाल में 20 हजार स्ट्रीट लाइट की बत्ती गुल, आंधी-बारिश के मौसम में गड्‌ढे समेटे बैठीं 200 किमी सड़कें अंधेरे में डूबीं

देश, राज्य

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

देश की स्मार्ट सिटीज की रैंकिंग में टॉप पर चल रहे भोपाल में स्ट्रीट लाइट के हाल बेहाल हैं। आंधी-बारिश के इस मौसम में भी यहां की 200 किमी से ज्यादा सड़कें रात के वक्त अंधेरे में डूबी रहती हैं। शहर की 60 हजार स्ट्रीट लाइट में से एक तिहाई यानी लगभग 20 हजार बंद हैं। इन दिनों नगर निगम के कॉल सेंटर पर एक दिन में औसतन 80 शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन इनका निपटारा 10-10 दिन तक भी नहीं होता।

शहर में सड़कों और सीवेज की तरह स्ट्रीट लाइट लगाने और सुधारने का काम दो अलग-अलग एजेंसियों के हवाले हो गया है। एक स्मार्ट सिटी कंपनी और दूसरा नगर निगम। कौन सी स्ट्रीट लाइट की जिम्मेदारी किसकी है, यह पता ही नहीं लगता। शिकायत दर्ज होने पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं। दोनों के बीच को-ऑर्डिनेशन का कोई मैकेनिज्म नहीं होने से हफ्तेभर तक यही तय नहीं होता कि आखिर यह स्ट्रीट लाइट सुधारना किसे है?

जिम्मेदारी- दो एजेंसियों- नगर निगम और स्मार्ट सिटी के पास है मेंटेनेंस का काम
गफलत- एक सप्ताह तक यह ही तय नहीं हो पाता कि बंद स्ट्रीट लाइट किसके हिस्से में और सुधारेगा कौन

डराते हैं ये इलाके…

एम्स से सुभाष नगर तक पूरा मेट्रो का प्रायोरिटी रूट, जिसमें एमपी नगर और बोर्ड ऑफिस चौराहा के साथ अरेरा हिल्स और साकेत नगर, शक्ति नगर भी शामिल हैं
चूना भट्‌टी
कोलार मेन रोड और आसपास की भीतरी सड़कें
लिंक रोड नंबर 3
सलैया, मिसरोद, शाहपुरा, बावड़िया कलां
कलियासोत इलाका
हर्षवर्धन नगर, माता मंदिर और आसपास
शिवाजी नगर
ऐशबाग और अशोका गार्डन इलाके की सड़कें।

नीलबड़ रोड की लाइट 10 दिन में बंद हो गई, इंजीनियर अनजान

भदभदा से नीलबड़ तक 5 किमी की फोरलेन पर चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले चालू हुई स्ट्रीट लाइट 10 दिन में ही बंद हो गईं। 10 अप्रैल से पूरी रोड पर अंधेरा है। पीडब्ल्यूडी के ईई विजय मनमानी ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। रहवासियों ने निगम के कॉल सेंटर पर शिकायत की तो जवाब मिला- अभी निगम को हैंडओवर नहीं हुई है।
को-ऑर्डिनेशन की कमी दूर करेंगे

स्मार्ट सिटी और नगर निगम के बीच को-ऑर्डिनेशन की कमी हैं। दोनों इसे दूर करने की कोशिश करेंगे: वीएस चौधरी कोलसानी, कमिश्नर, नगर निगम.

कोशिश होती है 24 घंटे के भीतर लाइट चालू हो जाए। कई बार तकनीकी कारणों से देरी हो जाती है: अंकित अस्थाना, सीईओ, स्मार्ट सिटी

Leave a Reply