गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

अकबरपुर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह मेडिकल स्टोर्स बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। ड्रग इंस्पेक्टर अनीता कुरील के ट्रांसफर के बाद लोगों में यह उम्मीद जगी थी कि पहली पोस्टिंग पर अंबेडकर नगर जिले में कमान संभालने वाले ड्रग इंस्पेक्टर शैलेंद्र प्रताप सिंह के आने से स्थिति में कोई सुधार होगा मगर साहब भी उसी रंग में रंग गए। ड्रग अधिनियम को ताक पर रखकर जनपद में कुकुरमुत्तों की तरह फर्जी मेडिकल स्टोरों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं शैलेंद्र प्रताप सिंह. आपको बताते चलें कि कहीं-कहीं तो गुमटियों में मेडिकल स्टोर संचालित है. स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी भनक है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर मीठा डोज दिया जा रहा है। नगर सहित ग्रामीण इलाके में हजारों की तादाद में मेडिकल स्टोर्स हैं। कहने को तो मेडिकल स्टोर्स के संचालन के लिए डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। जिले भर में कुछ मेडिकल व्यवसायी नियमों को ताक में रखते हुए मेडिकल का संचालन कर रहे हैं। बिना फार्मासिस्ट व जरूरी दस्तावेज के मेडिकल दुकान का व्यवसाय किया जा रहा है। कई मेडिकलों में अपात्र व्यक्तियों को जिम्मेदारी दे दी गई है, जिनको दवाइयों की जानकारी तक नहीं है। इन मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ न तो ड्रग इंस्पेक्टर कोई कार्रवाई करते हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। गैर डिप्लोमा, डिग्रीधारी द्वारा मेडिकलों का संचालन करने से मरीजों की जान को खतरा रहता है।
दूसरे के नाम के सर्टिफिकेट का उपयोग
कुछ मेडिकल दूसरे के नाम के सर्टिफिकेट पर लाइसेंस का उपयोग कर रहे हैं। मासिक या सालाना के आधार पर लाइसेंस के लिए लेन-देन होता है। अधिकांश मेडिकल स्टोर्स संचालक ग्राहकों को दवाओं का बिल नहीं देते हैं। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को कंपनी की दवाओं को छोड़कर उसी फॉर्मूले की लोकल दवाइयां थमा दी जाती हैं।
