नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

9 मार्च की शाम मौसम में अचानक से आए बदलाव के कारण आसमान में बादल भर गए और झमाझम बारिश शुरू हो गयी। जामनेर तहसिल के तोंडापुर जिला परिषद गुट के भारूडखेड़ा, मंडवा, ढालगांव, कुंभारी समेत आसपास के गांवों मे हुई बारिश से गेंहू, मकई, चना की फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। संतोष की बात यह है कि केला बागानों पर इस बारिश का कुछ खास बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। खबरें तो यह भी मिली कि इसी बीच बुलढाणा जिले के कुछ तहसीलों में भी बारिश हुई हैं। यहां भी खेतों में कटाई की प्रतीक्षा मे खड़ी फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जामनेर तहसील में हुए खेती के नुकसान का आधिकारिक आंकलन नहीं हो सका है। प्रशासन की और से इस बाबत की जानकारी आनेवाले कुछ दिनों में सामने आ सकती हैं। तोंडापुर के प्रगतिशील किसान तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिगंबर पाटिल (डी के दादा) ने बताया कि बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी फ़सलें काफी खराब हुई हैं जिससे अब उनका मार्केट तब आ पाना मुश्किल है। इस आपदा से किसानों को बड़ी आर्थिक मार पड़ी है। हम लोग किसान होने के नाते सरकार से यह अनुरोध करते हैं कि इस आपत्ती से पीड़ित किसानों के खेतो के जल्द से जल्द पंचनामे किए जाए और किसानों को सहायता राशी मिले। डी के दादा ने बताया कि हमारा जिला परिषद गुट अजंता पहाड़ियों से घिरा हुआ है। हर साल बेमौसमी बारिश जैसी समस्या से हमारे किसानों को जुझना पड़ता है अब इसे कुदरत का स्नेह कहें या नाराजगी इससे कोई शिकायत नहीं है बस सरकार अपने स्तर पर किसानों को तत्काल राहत प्रदान करे। विदित हो कि तहसील क्षेत्र के रबी में इस बार गेंहू, चना और मकई की पैदावार व्यापक मात्रा में है। बीते बरस इसी तरह की बारिश से होनेवाले नुकसान का दायरा काफी बड़ा था ! सुबे की ठाकरे सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र से संबंधित कर्ज माफी जैसे फैसलो से जहा किसानो में खुशी का माहौल है वहीं उक्त तरह कुदरत की मनमर्जी से होने होने वाले नुकसान को लेकर मिलने वाली मुफीद सरकारी सहायता को लेकर भी किसानों में आश्वस्तता का भाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
