मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

माननीय तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेश नन्देश्वर द्वारा अवयस्क बालिका को फुग्गे पानी पिलाने के बहाने एक खेत में साथ ले जा कर पहले दुष्कर्म फिर गला दबाकर हत्या करने के आरोप में कल मंगलवार को सचिन उर्फ ललित को उम्रकैद एवं 15 हज़ार रूपए के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है।
प्रकरण की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए जिला अभियोजन अधिकारी/ विशेष लोक अभियोजक श्री कैलाशनाथ गौतम द्वारा बताया गया कि, दिनांक 20-01-2017 को शाम लगभग 7.00 बजे फरियादी विठ्ठल मंदिर अपनी अवयस्क 12 वर्षीय पुत्री अभियुक्ती /मृतिका के साथ गया था, तभी उक्त पुत्री ने फरियादी पिता से कहा कि उसे फुग्गे पानी खाना है। इसलिए वह पानी के फुग्गे वाले के ठेले पर चली गयी और उसका पिता दुकान पर सामना लेने चला गया। थोड़ी देर बाद जब वह घर गया तब उसकी लड़की घर में नहीं मिली। उसने आसपास गांव में तलाश किया, इस पर भी उसे उक्त पुत्री नहीं मिली। तब उसे गांव के कोमल पिता सुनील ने बताया कि सचिन उर्फ ललित पिता अम्बादास निवासी बोरसल अपने साथ उक्त लड़की को सरकारी अस्पताल की तरफ लेकर जाते हुए उसने देखा है। इसके पश्चात उसे अपनी पुत्री की तलाश रातभर गांव में भी की। तब सचिन भी उसे नहीं मिला और उसकी पुत्री भी नहीं मिली। तत्पश्चात सुबह अभियुक्त आरोपी सचिन उसके खेत पर मिला तब उससे पूछा की पुत्री कहां है तब अभियुक्त सचिन ने कहा कि मुझे नहीं मालूम? तब फरियादी ने थाना शाहपुर जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई तो विवेचना के दौरान अभियुक्त सचिन को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो अभियुक्त सचिन ने बताया कि वह लड़की को पानी फुग्गे दिलाने का लालच देकर अपने साथ किशन पिता कौतिक के खेत में ले जाकर दुष्कर्म करने व उसके चिल्लाने पर उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसका गला दबाकर उसकी हत्या करने व कोई देख न ले, इस डर की वजह से शव को संतोष पिता बृजलाल के खेत की बावडी के पास हुए में डालकर छिपा दिया। पुलिस थाना शाहपुर द्वारा अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र धारा 363, 366(K), 346, 302, 201, 376,(2)(1), 376(k) एवं 3, 4, 5, 6 पाक्सो एक्ट तहत मामला दर्ज न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण में सफलता पूर्वक पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी श्री कैलाशनाथ गौतम एवं अति. जिला अभियोजन अधिकारी श्री रामलाल रंधावे द्वारा करते हुए विचारण पश्चात माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी सचिन उर्फ ललित को धारा 363 भा.द.सं. में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, धारा 366(क) भा.द.सं. में 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, धारा 346 भा.द.सं. में 2 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 अर्थदण्ड, धारा 376(2)(I) भा.द.सं. में आजीवन कारावास (शेष जीवन तक) एवं 2000 अर्थदण्ड, धारा 302 भा.द.सं. में आजीवन कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, धारा 201 भा.द.सं. में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, धारा 3/4 पाक्सो एक्ट में आजीवन कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, , धारा 5/6 पाक्सो एक्ट में आजीवन कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड इस प्रकार कुल 15 हज़ार रूपए के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।
