अविनाश द्विवेदी/शेरा मिश्रा, कटनी (मप्र), NIT;
नौकरी की चाह ना रखकर खुद का व्यवसाय करने का इरादा रोहिणी ने कुछ वर्ष पहले किया था। जिसके लिये उसने अपने बल पर स्वयं का व्यवसाय भी स्थापित किया। जिसके बाद अपने व्यापार को बढाने और उससे अधिक आमदनी निकालने के लिये रोहिणी ने सोचना प्रारंभ किया कि किस तरीके से अपने व्यवसाय से और अधिक आमदनी की जाये।
यह कहानी है बडवारा जनपद अंतर्गत ग्राम लखाखेरा निवासी रोहणी प्रसाद विश्वकर्मा की। जिन्होंने वर्ष 2013 में अपना स्वयं का सीमेन्ट और लोहे-सरिया बेचने का काम शुरु किया था। कुछ पूंजी लगाकर प्रारंभ किये गये इस व्यवसाय से रोहिणी को सारे खर्च काटने के बाद 5 से 6 हजार रुपये की आमदनी ही हो पाती थी। रोहणी बताते हैं कि सीमित पूंजी होने के कारण व्यापार से अधिक मुनाफा नहीं हो पा रहा था।
व्यापार को और बढाने के लिये रोहिणी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का सहारा लिया। जिसमें उन्हें 2 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, साथ ही नियमानुसार अनुदान भी। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बैंक से राशि मिलने के बाद राहिणी विश्वकर्मा ने इस राशि का उपयोग अपने व्यवसाय में किया। जिससे उन्होने अपनी दुकान में लोहे के सरिया, सीमेन्ट, तथा अन्य घर निर्माण में लगने वाली सामग्री का स्टॉक किया। इससे ना सिर्फ रोहिणी को बिक्री में फायदा मिला। इसके साथ ही अब होने वाली आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
अब रोहिणी की आय पहले की अपेक्षा दोगुनी हो गई है। इतना ही नहीं रोहिणी की दुकान से बडवारा जनपद के लगभग 20 से अधिक ग्रामों में होने वाले भवन व अन्य निर्माण की सामग्रही जैसे लोहा, सीमेन्ट, छतों की सीमेन्ट शीट इत्यादि की सप्लाई होती है। वर्तमान में रोहिणी प्रसाद विश्वकर्मा ने अपनी दुकान में लगभग 8 लाख से अधिक का स्टॉक मेन्टेन कर रखा है। जिससे उनके ग्राहकों को भी त्वरित और आसानी से निर्माण सामग्री उपलब्ध हो पा रही है।
रोहिणी ने इस योजना की सराहना की है। साथ ही अन्य युवाओं को शासन की योजनाओं से लाभ लेकर स्वरोजगार स्थापित करने की अपील भी की है।
