हनीफ खान, ब्यूरो चीफ, मिर्जापुर (यूपी), NIT:

इमाम हुसैन और शोहदा-ए-कर्बला की याद में चुनार क्षेत्र में जुलूस-ए-अमारी पूरे एहतराम और अकीदत के साथ निकाला गया।
यह कदीमी जुलूस सिब्ते हसन इमामबाड़ा, नार शहीद (चुनार) से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ वापस नार शहीद इमामबाड़े पहुंचा, जहां शांतिपूर्ण ढंग से इसका समापन हुआ।
अमारी और दुलदुल की जियारत के लिए उमड़ा जनसैलाब
जुलूस में शामिल अमारी और दुलदुल की जियारत के लिए चुनार तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद और आम लोग पहुंचे। दूर-दराज के इलाकों से आए लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
विभिन्न अंजुमनों ने पेश की नौहाख्वानी और सीनाज़नी
ऐतिहासिक जुलूस में बाहरी जिलों और राज्यों से आईं विभिन्न अंजुमनों ने शिरकत की और नौहाख्वानी व सीनाज़नी (मातम) पेश किया। इनमें प्रमुख रूप से—
– अंजुमन लश्कर-ए-मेहंदी (सासाराम)
– अंजुमन-ए-हैदरिया (चकिया)
– अंजुमन-ए-सज्जादिया (बनारस)
शामिल रहीं। अंजुमनों ने गमगीन माहौल में नौहाख्वानी करते हुए कर्बला की शहादत की याद ताजा कर दी।
मौलाना इफ्तिखार हुसैन ने कर्बला की शहादत पर डाला प्रकाश
जुलूस के दौरान आजमगढ़ से आए मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना इफ्तिखार हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने इमाम हुसैन की शहादत और कुर्बानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्बला के मैदान में कोई बराबरी की जंग नहीं हुई थी, बल्कि बातिल की ओर से नवासे-रसूल पर अत्याचार किया गया था। इमाम हुसैन ने हक और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
प्रशासन का रहा सराहनीय सहयोग
जुलूस के शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों ने चुनार के स्थानीय प्रशासन और पुलिस का विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया। प्रशासन की सतर्कता और मुस्तैदी के चलते पूरा आयोजन सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।

