मोहम्मद इसहाक़ मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

मैहर जिले के विकासखंड रामनगर अंतर्गत पीएम श्री कन्या संकुल से जुड़ी मध्यप्रदेश शिक्षा गारंटी योजना (EGS) में एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि रमेश जायसवाल नामक व्यक्ति बिना वैध नियुक्ति पत्र के पिछले लगभग दो दशकों से नौकरी कर शासन से वेतन प्राप्त कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यालय समन्वयक सर्वशिक्षा अभियान, जनपद शिक्षा केन्द्र रामनगर, जिला सतना द्वारा 27 अक्टूबर 2004 को जारी पत्र क्रमांक 286 रमेश जायसवाल (पिता जगदीश जायसवाल), ग्राम पंचायत भरतपुर (गुरजहन) के नाम प्रशिक्षण हेतु जारी किया गया था। लेकिन आरोप है कि इस प्रशिक्षण में रमेश जायसवाल (पिता रामचरण जायसवाल), निवासी ग्राम गैलहरी ने फर्जी तरीके से भाग लेकर नौकरी हासिल कर ली।
बताया जा रहा है कि ईजीएस गुरुजी की नियुक्ति ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और पालक-शिक्षक संघ की अनुशंसा के आधार पर होती थी, जिसमें संबंधित ग्राम पंचायत का निवासी होना अनिवार्य था। साथ ही आदिवासी क्षेत्र में प्राथमिकता आदिवासी अभ्यर्थियों को दी जानी थी। ऐसे में गैर-निवासी द्वारा नियुक्ति नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, रमेश जायसवाल की दो सगी भाभियां—कुसुम जायसवाल (गैलहरी केंद्र क्रमांक 01) और कमला जायसवाल (गैलहरी केंद्र क्रमांक 02)—भी ईजीएस गुरुजी के पद पर कार्यरत हैं, जिससे पूरे मामले में पारिवारिक स्तर पर नियुक्ति में गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है।
इसके अलावा, रमेश जायसवाल की पत्नी राजेश्वरी जायसवाल गैलहरी ग्राम पंचायत में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदस्थ हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों का निवासी कैसे हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि यदि संबंधित व्यक्ति की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) और दस्तावेजों की गहन जांच की जाए, तो नियुक्ति प्रक्रिया में कई अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।

