CET में Percentage बनाम Percentile पर बहस तेज़, अंतर समझना ज़रूरी | New India Times

इमरान खान, भुसावल/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

CET में Percentage बनाम Percentile पर बहस तेज़, अंतर समझना ज़रूरी | New India Times

प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के नतीजों को लेकर एक बार फिर Percentage और Percentile के अंतर पर बहस तेज हो गई है। आमतौर पर दोनों को एक जैसा मान लिया जाता है, जबकि इनके अर्थ और उपयोग पूरी तरह अलग हैं। Percentage कुल अंकों में प्राप्त अंकों का अनुपात दर्शाता है, वहीं Percentile यह बताता है कि परीक्षार्थी ने अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में कैसा प्रदर्शन किया।
हाल ही में CET परीक्षा के संदर्भ में करीब 1,200 विद्यार्थियों के बारहवीं के Percentage और प्रवेश परीक्षा के Percentile को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न तरह के निष्कर्ष और आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे संदर्भ और तथ्यों को समझना जरूरी है, क्योंकि अधूरी जानकारी से विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अनावश्यक मानसिक दबाव पड़ सकता है।
शैक्षणिक विशेषज्ञों के अनुसार, बारहवीं बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। यही कारण है कि कई विद्यार्थी बोर्ड में औसत प्रतिशत होने के बावजूद CET, JEE जैसी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर लेते हैं। प्रवेश परीक्षाएं केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि विश्लेषणात्मक क्षमता, समस्या समाधान, गति और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में प्रदर्शन को भी परखती हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पूरा विवाद लगभग 18 लाख परीक्षार्थियों में से बेहद सीमित मामलों से जुड़ा है, जो कुल संख्या का 0.007 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में कुछ उदाहरणों के आधार पर पूरी परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाना उचित नहीं माना जा रहा है।
देश के कोटा, दिल्ली, पुणे, नागपुर जैसे शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की बड़ी संख्या भी इसी तथ्य को दर्शाती है कि बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा की तैयारी और मूल्यांकन पद्धति अलग-अलग है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यदि दोनों परीक्षाओं का उद्देश्य समान होता, तो इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश के लिए अलग से CET या JEE जैसी परीक्षाओं की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
ऐसे में परीक्षा परिणामों पर चर्चा करते समय व्यापक आंकड़ों, तथ्यों और संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बना रहे और मेहनत करने वाले लाखों विद्यार्थियों के प्रदर्शन का सम्मान हो सके।

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