जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

यूथ कांग्रेस के नेता अमित खत्री को बदनाम करने के षड्यंत्र की पोल थाने से मिली आधिकारिक जानकारी के बाद खुल गई है। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे दावों में अमित खत्री का नाम जिस व्यक्ति से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा था, वह वास्तव में अमित खटीक निकला। दोनों की वल्दियत (पिता का नाम) पूरी तरह अलग है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूरा प्रकरण सिर्फ झूठा प्रचार और बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश थी।
थाने से संपर्क कर जानकारी लेने पर पुष्टि हुई कि किसी भी स्तर पर दोनों व्यक्तियों के बीच कोई संबंध नहीं है। यह मामला तब उछाला गया जब मंत्री बागरी के भाई पर लगे गंजा तस्करी मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था। लेकिन इसके बावजूद आरोपों में कहीं भी अमित खत्री का नाम नहीं पाया गया।
सोशल मीडिया पर फैली पोस्टों की जांच के बाद साफ़ होता है कि यह विवाद राजनीतिक गंदगी और कांग्रेस की आंतरिक खींचातानी का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय नेतृत्व को भी सतर्क रहना चाहिए ताकि इस प्रकार की बदनामी की साज़िशों को जगह न मिले।
