पीरपैंती पावर प्लांट भूमि मुआवजा विवाद पर डीएम की बैठक, रैयतों से शीघ्र समाधान की अपील | New India Times

अतीश दीपंकर ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

पीरपैंती पावर प्लांट भूमि मुआवजा विवाद पर डीएम की बैठक, रैयतों से शीघ्र समाधान की अपील | New India Times

जिले के पीरपैंती प्रखंड कार्यालय सभाकक्ष में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में पीरपैंती पावर प्लांट के लिए अधिगृहित भूमि के मुआवजे को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव भी उपस्थित रहे। बैठक में उन रैयतों को बुलाया गया था जिनका मुआवजा अभी देय है, साथ ही ऐसे रैयत भी शामिल हुए जो अब भी अधिगृहित भूमि पर फसल उगा रहे हैं।

पीरपैंती पावर प्लांट भूमि मुआवजा विवाद पर डीएम की बैठक, रैयतों से शीघ्र समाधान की अपील | New India Times

बैठक के बाद जिलाधिकारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि जिन रैयतों के नाम से पंचाट बना है, उनके उत्तराधिकारियों के बीच आपसी विवाद है, जो सिविल कोर्ट या लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट अथॉरिटी (लाड़ा कोर्ट) में विचाराधीन है। यदि संबंधित पक्ष आपसी विवाद का निपटारा कर मुआवजा प्राप्त करने हेतु आवेदन करते हैं, तो जिला प्रशासन लाड़ा कोर्ट से मामला वापस लेकर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करेगा। संबंधित मुआवजा राशि जिला भू-अर्जन कार्यालय में सुरक्षित रखी गई है।

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जिलाधिकारी ने कहा कि कुछ मामलों में ऐसे आश्रित हैं, जिनके नाम से पंचाट बना था और जिनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे मामलों में मुआवजा राशि 50 लाख रुपये से अधिक है। इस संबंध में विभाग से पत्राचार किया गया है कि यदि देय राशि की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाई जाती है, तो भू-अर्जन कार्यालय स्तर से ही भुगतान किया जा सकेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट से आदेश प्राप्त करना आवश्यक है। आदेश मिलते ही मुआवजा का भुगतान कर दिया जाएगा।

डीएम डॉ. चौधरी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया है कि कुछ लोगों ने अधिगृहित भूमि पर पुनः फसल लगा दी है, जबकि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना वर्ष 2013 में जारी हो चुकी थी और मुआवजा वर्ष 2015 में ही वितरित कर दिया गया था। इसके बावजूद सरकारी भूमि पर फसल उगाना नियमों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा पावर प्लांट के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया जा चुका है और अक्टूबर-नवंबर में फसल की कटाई भी हो चुकी थी। इसके बाद दोबारा सरकारी भूमि पर फसल लगाना अनुचित है।

जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ लोग आम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसे लोगों से अपील है कि वे भोली-भाली जनता को गुमराह न करें। प्रशासन की नजर ऐसे तत्वों पर है और आवश्यकता पड़ने पर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्रगुप्त सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं रैयत उपस्थित थे।

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