भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह: संघर्ष से सफलता तक एक प्रेरणादायक प्रशासनिक यात्रा | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

आईएएस अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह (बैच 2010, मध्य प्रदेश कैडर) एक ऐसे समर्पित और जन-केंद्रित प्रशासक हैं, जिन्होंने संघर्षों से उठकर सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने की मिसाल पेश की है।

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के महेशपुर गाँव में जन्मे कौशलेंद्र ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हिंदी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की। इंटरमीडिएट के बाद इलाहाबाद जाकर यूपीएससी की तैयारी की और 2010 में सफलतापूर्वक सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की।

उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किए, विशेष रूप से ग्वालियर और भोपाल में। विकास, जनकल्याण, पर्यटन, स्वच्छता और संकट प्रबंधन में उनके योगदान को व्यापक सराहना मिली।

1. प्रारंभिक भूमिकाएँ और आधारभूत विकास

नीमच कलेक्टर (9 जून 2017–19 जून 2018):
राजस्थान सीमा से सटे नीमच जिले की जटिलताओं को समझते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास, सिंचाई और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा पर कार्य किया। यह उनका पहला कलेक्टर पद था, जिसमें उन्होंने जिले की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सागर नगर निगम आयुक्त एवं नरसिंहपुर जिला पंचायत सीईओ:

सागर में शहरी नियोजन और स्वच्छता पर जोर दिया, जबकि नरसिंहपुर में पंचायती राज और ग्रामीण सशक्तिकरण को मजबूती दी।

2. ग्वालियर कलेक्टर (11 मार्च 2020–30 जनवरी 2023): संकटकाल में सशक्त नेतृत्व

ग्वालियर में उनका कार्यकाल कोविड-19 महामारी के दौरान रहा, जो समाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों में समान दक्षता से कार्य किया।

कोविड प्रबंधन:

• वैक्सीनेशन अभियान को तेज गति दी।

• दिसंबर 2021 में वैक्सीनेशन लक्ष्य न मिलने पर सख्त चेतावनी देकर चर्चा में रहे, जिससे अभियान में तेजी आई।

• जिले ने उच्च वैक्सीनेशन कवरेज हासिल किया।

विकास कार्य:

• ग्वालियर को औद्योगिक व पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में योगदान।

• सड़क, जल आपूर्ति एवं शिक्षा सुविधाओं का विस्तार।

• उनके नेतृत्व में जिले को मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड मिला।

जनसुनवाई:

• नागरिकों की समस्याएँ धैर्यपूर्वक सुनकर त्वरित समाधान करना उनकी विशेष पहचान रही।

3. मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के एमडी (2023–2024): पर्यटन बढ़ावा

• अप्रैल 2023 में भोपाल कलेक्टर बनाए जाने के 24 घंटे बाद उन्होंने स्वेच्छा से एमडी, पर्यटन निगम का दायित्व संभाला।

• ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की विशाल मूर्ति का निर्माण पूरा कराया।

• मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।

• पर्यटन स्थलों के आधारभूत ढांचे को विकसित कर मध्य प्रदेश को एक मजबूत पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित किया।

4. भोपाल कलेक्टर (जनवरी 2024–वर्तमान): राजधानी का परिवर्तनकारी नेतृत्व

जनवरी 2024 में पुनः भोपाल कलेक्टर नियुक्त किए गए। उनके नेतृत्व में राजधानी ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024:

• भोपाल को देश की सबसे स्वच्छ राजधानी का खिताब दिलाया।

जनसुनवाई का नया मॉडल:

• कतारों की बजाय हॉल में बैठाकर व्यक्तिगत रूप से शिकायतें सुनना शुरू किया।

• भूमि विवाद, नागरिक समस्याएँ और कल्याणकारी योजनाओं का तेज समाधान सुनिश्चित किया।

झुग्गी-मुक्त भोपाल अभियान:

• भोपाल को भारत की पहली झुग्गी-मुक्त राजधानी बनाने का लक्ष्य।

• 4–5 महीनों में व्यापक सर्वे और पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की।

विकास कार्य:

• ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से भोपाल को औद्योगिक राजधानी बनाने का प्रयास।

• शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान।

• ₹758 करोड़ से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन।

चुनावी दायित्व:

• SIR-2025 के तहत मतदाता सूची गणना चरण को शत-प्रतिशत पूरा कराया और BLO–पर्यवेक्षकों को सम्मानित किया।

शहरी सुधार:

• भोपाल झील में शिकारा सेवा शुरू कर रोजगार बढ़ाया।

• स्वच्छता, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष अभियान चलाए।

5. पुरस्कार एवं मान्यताएँ

मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड (ग्वालियर में उत्कृष्ट शासन हेतु)
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल की ऐतिहासिक उपलब्धि
कुल मिलाकर, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह एक कुशल, संवेदनशील, सक्रिय और जनोन्मुखी प्रशासक के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाते हुए भोपाल में शासन की नई दिशा स्थापित की है।

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