महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की रैलियां कराने से कतरा रहे हैं खुद भाजपा प्रत्याशी, चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में चढ़ा सियासी पारा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की रैलियां कराने से कतरा रहे हैं खुद भाजपा प्रत्याशी, चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में चढ़ा सियासी पारा | New India Times

18 वीं लोकसभा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के लिए लोकप्रिय चेहरा नहीं रहे हैं। 8 अक्टूबर को हरियाणा जम्मू कश्मीर के नतीजे इस बात पर मुहर लगा देंगे। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिराकर देवेन्द्र फडणवीस ने मोदी-शाह की मैजिक छड़ी को तोड़ दिया है। 15 से 20 नवंबर के बीच राज्य में चुनाव होना है। पिछले तीन महीनों में एकनाथ शिंदे सरकार ने कैबिनेट में 500 से अधिक निर्णय पारित कर दिए हैं। अमल के लिए सरकारी खजाने में फूटी कौड़ी नहीं है। राज्य पर 9 लाख करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ गया है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की रैलियां कराने से कतरा रहे हैं खुद भाजपा प्रत्याशी, चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में चढ़ा सियासी पारा | New India Times

किसी जमाने में मिनी मोदी का तमगा धारण करने वाले भाजपा के नेता खुद को पांचवीं सातवीं बार जितवाने के लिए अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रुकने को मजबूर है। प्रदेश कि जनता खुलकर प्रकट होने से बच रही है परिणाम स्वरूप भाजपा संभावित नुकसान को भांप नहीं पा रही है। भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जो सोनिया गांधी की रैली के बाद भी चुनकर आए थे आज वो अपनी सीट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा को बुक करने से इस लिए कतरा रहे हैं कि कहीं वो मोदी के कारण हार न जाए।

आज वाशिम के पोहरादेवी गड़ पधारे नरेन्द्र मोदी ने मां शक्ति की आराधना की उसके बाद संबोधन में बड़ी महानता से इस बात को कहा कि ” जिसको किसी ने नहीं पूजा उसको मोदी पूजता है ” शायद PM बंजारा समाज के सम्मान में इस लाइन को बोल रहे होंगे। मोदी ने कहा लाड़ली बहना योजना नारी शक्ति का सम्मान है। कांग्रेस की सोच विदेशी है, अर्बन नक्सली कांग्रेस को चला रहे हैं।

मोदी कांग्रेस को विदेशी बता रहे थे वहीं दूसरी ओर कोल्हापुर में लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी भारत के संविधान सम्मान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले राहुल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के शिल्प अनावरण मंच से कहा शिवाजी महाराज “सब” के हैं उन्हीं की प्रेरणा से भारत का संविधान बना है। “समानता” ही उनकी विचारधारा है शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का विरोध करने वाले कौन थे महाराष्ट्र जानता है। यह लड़ाई दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई है।

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