इमरान खान, जलगांव/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

मध्यपूर्व में पिछले 40 दिनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने 2 हफ्तों के लिए सशर्त युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर राहत की भावना देखी जा रही है, हालांकि स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते का ऐलान करते हुए कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनाई है। इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा से पहले ही समझौता हो गया।
समझौते की सबसे अहम शर्तों में हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना शामिल है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मार्ग के खुलने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उस पर हमले पूरी तरह बंद रहते हैं, तभी यह युद्धविराम जारी रहेगा। किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई होने पर समझौता टूट सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में चीन और पाकिस्तान की मध्यस्थता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के माध्यम से ईरान ने अमेरिका को 10 सूत्रीय प्रस्ताव भी भेजा था, जिस पर सहमति बनने के बाद यह युद्धविराम संभव हो पाया।
अब दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें स्थायी शांति और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
▪️ अमेरिका–ईरान के बीच 2 हफ्तों का सशर्त युद्धविराम
▪️ हॉरमुज़ जलडमरूमध्य फिर से खोलने पर सहमति
▪️ डोनाल्ड ट्रम्प ने किया ऐलान
▪️ ईरान की शर्त – हमले पूरी तरह बंद रहें
▪️ चीन और पाकिस्तान की मध्यस्थता अहम
▪️ 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में वार्ता प्रस्तावित
फिलहाल यह कदम तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजरें बनी हुई हैं।

