नागदा को जिला बनाने की घोषणा के अगले ही दिन कलेक्टर ने शासन को भेजा प्रस्ताव | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, झाबुआ/ उज्जैन (मप्र), NIT:

नागदा को जिला बनाने की घोषणा के अगले ही दिन कलेक्टर ने शासन को भेजा प्रस्ताव | New India Times

मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर प्रशासन को तीन दिन में प्रस्ताव देने को कहा। प्रशासन ने इस पर तत्काल काम शुरू कर दिया। कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया।

इसमें चार तहसील जिनमें उज्जैन की दो नागदा, खाचरौद और रतलाम जिले की आलोट और ताल को भी शामिल किया गया है।
इनके अंतर्गत 200 से अधिक ग्राम पंचायतों के 422 गांव शामिल किए गये हैं। इस आधार पर नागदा जिला बनता है तो प्रारंभ में चार तहसीलों वाला जिला रहेगा। उन्हेल के तहसील बनने के बाद इसमें पांच तहसील हो जाएंगी।
वहीं उज्जैन जिले से दो तहसील कम होंगी।
साथ ही जावरा, बड़नगर, महिदपुर,आलोट ताल शहरों से दावे आपत्ति के शुर उठने लगे है।

जावरा 25 साल में जिला नहीं बना नागदा 10 साल में घोषित

जावरा को मांग उठाते हुए 25 साल हो गए लेकिन हमारी मांग सिर्फ मांग बनकर रह गई और खाचरौद तहसील के जिस नागदा टप्पे को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने सिर्फ जनता की जिद के कारण तहसील का दर्जा दिया था।
जो आज तक अनुविभाग नहीं बन पाया बल्कि नागदा को जिला बनाने की मांग भी सिर्फ 10 साल पहले शुरू हुई लेकिन नेताओं के साथ नागदा की जनता ने इसे जन आंदोलन का रूप दे दिया तो वोटों का गणित ना गड़बड़ा जाए इसलिए लगातार तीसरी बार शिवराजसिंह चौहान ने नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर दी।
सिर्फ राजनीतिक इच्छा शक्ति और जनआंदोलन ही वो ताकत है कि वहां सरकार झुक गई। जबकि जावरा कभी गांधी वादी तरीके से भी अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पाया। स्पष्ट है जावरा पुरानी तहसील व अनुविभाग होने के साथ ही यहां का दावा हर दृष्टि से मजबूत है लेकिन ये मांग जनता की आवाज नहीं बन सकी, इसलिए पिछड़ गए। यह बात अब यहां के नेता व लोगों को आभास हो रही है। जावरा विस क्षेत्र में जिला बनाने की मांग को लेकर पैदल यात्रा निकाल रहे वीरेंद्रसिंह सोलंकी ने ये बात स्वीकार की और कहा कि हम – जावरा को जिला बनाने की मांग को जनता की आवाज बनाएंगे।
सिर्फ जावरा ही नहीं बल्कि ताल व आलोट भी चाहते हैं कि वे जावरा के साथ रहें इसलिए जल्द वहां भी हमारी – पैदल यात्रा पहुंचेगी और ये जावरा जिला बनकर रहेगा।

गांधी वादी तरीके से सरकार को जनता अपनी ताकत दिखाएगी। जावरा के समाजसेवी सुदेश खारीवाल कहते हैं कि सिर्फ राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी से हमारी मांग पूरी नहीं हुई। जन चेतना मंच पदाधिकारी जगदीश राठौर बोले कि वर्ष 1998 में ही तत्कालीन कार्यवाह अध्यक्ष व उपाध्यक्ष धरमचंद चपड़ोद के कार्यकाल में जावरा को जिला बनाने की मांग हो चुकी है। इसके बाद तो कई हस्ताक्षर अभियान, ज्ञापन व आंदोलन हुए लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मांग अब तक पूरी नहीं हुई।
अब और ताकत से मांग रखी जाएगी।

बड़नगर और महिदपुर ने पहले ही दूरी बनाई

नागदा जिले में बड़नगर, महिदपुर ने शामिल होने में रुचि नहीं दिखाई। बड़नगर विधायक मुरली मोरवाल ने कहा, उज्जैन अधिक उपयुक्त व सुविधा जनक है।


गांधी चौक से लेकर थाने तक पैदल मार्च निकाला जावरा -रतलाम का ही हिस्सा रहे ताल

ताल व्यापारी महासंघ अध्यक्ष श्याम माहेश्वरी के नेतृत्व में समस्त व्यापारी व आम नागरिक शनिवार दोपहर गांधी चौक में जुटे। यहां से नीमचौक, राणा प्रताप मार्ग होते हुए थाने तक पैदल मार्च निकाला। पहले तो विधायक चावला को घेरा, फिर उन्हें साथ लेकर गए। थाना प्रभारी नागेश यादव व तहसीलदार के प्रतिनिधि पटवारी रंगलाल शर्मा को ज्ञापन दिया तो इसका वाचन भी व्यापारियों ने विधायक से ही करवाया। इसमें लिखा ताल यानी हम जावरा -रतलाम का ही हिस्सा रहेंगे। व्यापारी संघ अध्यक्ष माहेश्वरी के साथ ही नटवर सोनी, नवीन मेहता, नरेंद्र भरगढ़, सुनील बाठिया, गोल्डी धनोतिया, मनोहर राठौर, सुजानमल जैन, मनोज जैन, निर्मल बाठिया, रामचंद्र शर्मा, पार्षद पवन मोदी, बंशीलाल पोरवाल, सुशील सकलेचा, बलदेव सोनी समेत अन्य नागरिक मौजूद थे।

विधायक बोले : मैं आपके साथ
गांधी चौक पर विधायक चावला से व्यापारी बोले कि आपने पहले तो नागदा में आलोट-ताल को शामिल करने का बयान दे दिया था, जो सहन नहीं करेंगे। हम जावरा व रतलाम के साथ रहना चाहते है क्योंकि हमारा व्यापारिक, शैक्षणिक व सामाजिक केंद्र जावरा -रतलाम है इसलिए नागदा में शामिल नहीं होंगे और इस मुहिम में आपको साथ देना पड़ेगा। विधायक चावला ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में ताल, आलोट नगर परिषद ने नागदा की सहमति दी थी। इधर एक दिन पहले नागदा में भाजपा नेताओं ने पत्रकारवार्ता करके ये कह दिया कि आलोट विधायक साथ नहीं देंगे तो उनका नागदा जिला नहीं बन पाएगा, यानी उन्होंने गेंद हमारे पाले में डाल दी तो मैंने सिर्फ ये कहा था कि जनता जैसा चाहेगी वैसा निर्णय लेंगे। अब यदि आप जावरा, रतलाम में ही रहना चाहते हैं तो हम आपके साथ हैं। सीएम ने भी कहा है कि जो तहसील खुशी-खुशी नए जिले में शामिल होना चाहेगी, उसे ही लेंगे। जिले की अधिसूचना से पहले से दावे-आपत्ति ली जाएगी, तब आप भी कर सकेंगे। हम जनता की भावना के साथ हैं और जैसा जनता चाहेगी, वैसा होगा।

नागदा को जिला बनाने की घोषणा पर किया कटाक्ष

उज्जैन- आलोट संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने नागदा को जिला बनाने मुख्यमंत्री की घोषणा पर कटाक्ष किया है। कहा गया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2013 एवं वर्ष 2018 इसके बाद हाल ही में वर्ष 2023 में तीसरी बार नागदा को जिला बनाने की घोषणा की है। नोटिफिकेशन की समय सीमा 90 दिन की है। विधानसभा चुनाव नजदीक है सरकार के पास इतना वक्त ही नहीं है कि यह नोटिफिकेशन जारी कर जिला बना सके जिला बनाने के लिए जिले की सीमाओं का निर्धारण करना फिर उसका नोटिफिकेशन जारी करना, नोटिफिकेशन पर दावे आपति बुलवाना आदि में समय लगता है। सरकार के पास चुनाव आचार सहिता लागू होने में अब इतना समय ही नहीं है।
प्रस्ताव भेजा
◆ नागदा को जिला बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें नागदा, खाचरौद, आलोट व ताल तहसीलाें को शामिल किया है: कुमार पुरुषोत्तम, कलेक्टर उज्जैन

अब नागदा जिला बने उससे पहले ये प्रक्रियाएं होंगी

कलेक्टर, के प्रस्ताव पर चर्चा उपरांत शासन स्वीकृति देगा।

स्वीकृत, प्रस्ताव के आधार पर प्रारंभिक अधिसूचना जारी होगी।

प्रारंभिक, अधिसूचना पर आमजन से दावे-आपत्ति मंगाए जाएंगे।

दावे-आपत्ति, का समय सीमा में निराकरण किया जाएगा।

दावे-आपत्ति, निराकरण के बाद शासन नोटिफिकेशन कर नागदा जिला घोषित करेगा।

नागदा जिला, बनने के साथ ही प्रशासनिक अमला तैनात होगा।
फाइनल नोटिफिकेशन जारी होने में डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं।

सितंबर तक नागदा नए जिले के रूप में अस्तित्व में आ सकता है।

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