नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सावधान अगर आप किसी काम से जिला मुख्यालय जलगांव जा रहे हैं तो कृपया अपने चेहरे को मास्क से ढक लें अन्यथा आपको आने वाले तीन से चार दिनों तक सर्दी बुखार गले में सूजन जैसी समस्याओं का शिकार होना पड़ेगा। कायदे से यह एडवाइजरी स्वास्थ विभाग को जारी करनी चाहिए जिसे जारी करने से सरकार में बैठे मंत्रियों को आइना दिखेगा लेकिन इस प्रकार की ईमानदार सोच की उम्मीद प्रशासन से करना मतलब प्रशासन की सरकार से बगावत होगी। कुछ दिनों पहले NCP नेता एकनाथ खडसे द्वारा जलगांव की उखड़ी हुई सड़कों का मुआयना करने के बाद JMC ने आननफानन में सड़कों को डामर से पोतना शुरू कर दिया है। इस पुताई की गुणवत्ता बेहद घटिया है, गनीमत है कि बारिश का मौसम नहीं है वरना इन पुती हुई सड़कों का बारिश से क्या हाल होता पता नहीं। खैर बदहाल सड़कों के कारण जलगांव के नागरिक आए दिन सरकारी और निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। JMC के आम चुनावों के दौरान मंत्री गिरिश महाजन ने जलगांव के लिए 100, 200, 300 करोड़ रुपयों तक के फंड की बात कही थी जो बाद में एक भयानक जुमला साबित हुआ। शिंदे सरकार में जलगांव जिले को दो कैबिनेट मंत्री मिले हैं जिनका पूरा ध्यान उनको दी गई सरकारी प्रतिष्ठा पर केंद्रित है। जलगांव PWD में कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनको नासिक डिवीजन में अतिरिक्त नियुक्तियां दी गई हैं जिनका कारण गुलदस्ते में है। इन्हीं अधिकारियों की बदौलत जिले में कई सड़कों की करोड़ों रुपयों की लागत से वर्क ऑर्डर्स रिलीज की जा रही हैं जिसमें भ्रष्टाचार के पहलू छिपे हुए हैं। 19 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है जिसमें जिले में हो रही तमाम धांधलियों पर चर्चा होगी। कोर्ट ने पूर्व मंत्री तथा जलगांव के संरक्षक रहे सुरेश जैन को एक मामले मे जमानत देने के बाद जलगांव की जनता की जैन से उम्मीदे बढ़ी हैं। दूध फेडरेशन के लिए आम चुनाव में महाविकास आघाडी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। इसी बीच मंत्री महाजन के गृह नगर जामनेर में विपक्ष अचानक से जागृत हो गया है जिसके चलते लोगों को यह पता चल रहा है कि मार्च 2023 में जामनेर नगर परिषद के आम चुनाव होने है। जामनेर की जनता की समस्याओं को लेकर पूरे पांच साल तक विपक्ष का कोई दल संघटन पार्टी नेता सुध लेने नहीं आता। रही बात बीजेपी की तो उसके नेताजी और कार्यकर्ता गण जनता के सुख दुःख में उनकी सहभागिता के इमोशनल मुद्दे को आज तक राजनीती के लिए इस्तेमाल करते आए हैं। डंपिंग ग्राउंड पर खुले में हर रोज 5 टन कचरा जलाया जा रहा है। करोड़ों रुपए का कचरा रिसायकल प्लांट अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। भूमिगत सुरंगी नाली स्किम बुरी तरह से पिटने को है। आवास योजना के 138 आवासों की अब तक बहाली नहीं हो सकी है। नियमानुसार दो फीसद तक बढ़ाई गई टैक्स के आर्थिक भार से जनता परेशान है। पेड़ पौधा, शिक्षा, स्वास्थ टैक्स के नाम पर पेयर्स की जेब काटकर सरकारी तिजोरी भरी जा रही है जबकि नगर परिषद की स्थापना से लेकर अब तक नगर परिषद का न कोई स्कूल है ना ही कोई अस्पताल है।
