नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मीडिया द्वारा संकट मोचक का तमगा दिए गए सूबे के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन के गृह नगर जामनेर में बीते पंद्रह सालों से आदिवासी छात्रों के लिए संचालित सरकारी छात्रावास किराए की इमारत में चल रहा है। एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प यावल के अधीन आदिवासी समाज के मेधावी छात्रों के लिए 2008 से शासकीय छात्रावास चलाया जा रहा है। इस छात्रावास में भिल्ल, पारधी, तड़वी, ठाकूर समुदाय से कुल 80 छात्र हैं जिनके खानपान से लेकर निवास पर सरकार सामाजिक न्याय के तहत लाखों रुपया खर्च कर रही है। छात्रावास की अपनी खुद की इमारत नहीं होने के कारण सरकारी तिजोरी से हर महीने का करीब एक लाख रुपया किराए के रूप में निजी संपत्ती धारक को अदा किया जा रहा है। इस किराए के निर्धारण को लेकर भी बिजली पानी, शौचालय, पेशाबघर, बाथरूम, बेड साफ सफाई जैसे कई व्यापक पैमाने होते हैं जिसे जांचना सिस्टम का काम है। छात्रावास की निजी इमारत का महीने का एक लाख किराया कैसे निर्धारित किया गया यह अलग से जांच का हिस्सा है। 2008 से आज तक 15 सालों में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये किराया दिया गया है। इतने पैसों से कम में तो सरकार की अपनी इमारत बन जाती। छात्रावास के गृहपाल प्रवीण रोकड़े ने बताया कि हमने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में छात्रावास के लिए राजस्व विभाग की ओर से भूमी की मांग कर रखी है। इस किराए के छात्रावास के लिए हमें निजी संपत्ती धारक से तीन साल का अनुबंध करना होता है। छात्रावास के इमारत से जुड़ा कामकाज काफी हद तक PWD देखती है। विदित हो कि जलगांव जिले के कई तहसीलों में सरकारी इमारतों में आदिवासी छात्रालय है। गिरीश महाजन के पास अगर आदिवासी विकास मंत्रालय होता तो शायद जामनेर में आदिवासी छात्रालय कब का बन जाता। विपक्ष के आरोपों के मद्देनजर इस प्रकार का उपहास करना इस लिए गलत नहीं होगा क्योंकी महाजन के पांच साल सिंचाई मंत्री रहते जिले में सिचाई का एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका और न ही नया प्रोजेक्ट आया।
