संगम-1 बांध निर्माण से प्रभावित आदिवासी किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

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सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के अंतर्गत संगम-1 बांध निर्माण हेतु निजी भूमि अधिग्रहण के मामले में प्रभावित कृषकों द्वारा जुन्नारदेव एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि संगम-1 बांध से प्रभावित समस्त कृषकों ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों का लिखित पत्र विगत वर्ष 11 अप्रैल 2025 को भू-अर्जन अधिकारी को प्रस्तुत किया था, लेकिन आज तक किसानों को उनकी मांगों के संबंध में कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे प्रभावित आदिवासी कृषकों में भारी रोष व्याप्त है।

संगम-1 बांध निर्माण से प्रभावित आदिवासी किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी | New India Times

कृषकों का कहना है कि उन्हें उनकी मांगों का स्पष्ट और प्रमाणिक जवाब चाहिए तथा वे समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में प्रकाशित खबरों पर विश्वास नहीं करते। किसानों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहां उनका सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

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ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसी भी स्थिति में प्रभावित आदिवासी कृषकों एवं भू-स्वामियों के हितों और अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा। शासन से मांग की गई है कि बांध निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले भू-अर्जन अधिकारी द्वारा किसानों की सभी मांगों की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसान किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जालसाजी का शिकार न हों।

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किसानों ने “रेड जोन” में आने वाले भू-स्वामियों का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि रेड जोन में आने वाले कई कृषकों को प्रभावित सूची से बाहर रखा गया है। यदि ऐसा है तो यह किसानों के साथ अन्याय होगा। किसानों ने मांग की कि इन भू-स्वामियों का भी सर्वे किया जाए और डूब क्षेत्र के किसानों की तरह उन्हें भी सभी लाभ प्रदान किए जाएं।

ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि बांध निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व सभी प्रभावित कृषकों एवं भू-स्वामियों की मांगों का समाधान किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी किए बिना बांध निर्माण कार्य शुरू किया गया, तो श्री मांझी अंतरराष्ट्रीय समाजवाद किसान सैनिक संगठन एवं प्रभावित आदिवासी कृषक/भू-स्वामी मध्यप्रदेश शासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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