रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ जिले के कल्लीपुरा निवासी श्रीमती गल्ली हेतिया मेडा की पहले आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर थी। पति की मृत्यु भी हो गई थी इस कारण से छोटी छोटी जरूरत के लिए सेठ साहुकार से पैसा उधार लेना पडता था और उधारी चुकाने हेतु पलायन कर बहार के राज्यों में जाकर मजदूरी करना पड़ती थी। पैसे नहीं होने की वजह से बच्चों को अच्छी शिक्षा भी प्राप्त नहीं हो पा रही थी। वर्तमान में म.प्र. डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्य से सीता महिला बचत स्वयं सहायता समूह में जुड़ने के बाद गल्ली हेतिया ने बैंक से लोन लेकर सर्वप्रथम स्वयं के खेत को काली मिट्टी डालकर सुधारा उसके बाद कृषि कार्य पर उत्पादन व्यवसाय करने लगी। इसके साथ मुर्गीपालन का कार्य भी प्रारंभ किया जिससे प्रतिमाह 8 हजार से 10 हजार रूपए की आय प्राप्त हो जाती है। कपास की फसल भी अच्छी होने से घर की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ। बेटा भी पूर्व में मजदूरी करता था वर्तमान में मां के साथ कृषि का कार्य एवं मुर्गीपालन कर बेटा ने चार पहिया वाहन खरीदा जिसको किराया से चलाकर प्रतिमाह 10 हजार से 12 हजार रूपए की आय अर्जन कर रहा है। विभिन्न गतिविधी से मासिक आय का विवरणः- मुर्गीपालन से 8 हजार से 10 हजार आय, चार पहिया वाहन से 10 हजार से 12 हजार आय, कृषि कार्य से 8 हजार से 10 हजार आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार गल्ली हेतिया ने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका को संवनीय बनाया एवं गल्ली के परिवार की सामाजिक स्थिति भी काफी मजबूत हो गई है।
