विलुप्त हो रही सामग्री की लगाई गई प्रदर्शनी व एक युवती दिप्तेश्वरी गुथरे द्वारा बनाया गया सेल्फी पॉइंट | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (मप्र), NIT:

विलुप्त हो रही सामग्री की लगाई गई प्रदर्शनी व एक युवती दिप्तेश्वरी गुथरे द्वारा बनाया गया सेल्फी पॉइंट | New India Times

अलिराजपुर जिले के जोबट भगोरिया पर्व में दिप्तेश्वरी गुथरे (आदिवासी बेटी) ने विलुप्त होती जा रही सामग्री की प्रदर्शनी लगाई। उस युवती से पूछा गया तो बताया कि मैंने भगोरिया हाट में आदिवासीयों की जीवन शैली संस्कृति और कला को प्रदर्शनी व स्टाल के माध्यम से प्रस्तुत किया है। भगोरिया हाट में प्रदर्शनी लगाने का मेरा मुख्य उद्देश्य अपनी संस्कृति का संरक्षण करने का और लोगों को संदेश देना और साथ ही देश विदेश से लोगों को अपनी संस्कृति से रूबरू करवाना है। प्रदर्शनी में बहुत सी चीजें मेरे हाथों से सजाई गई थी। सेल्फी पॉइंट बनाया गया और साथ ही सांस्कृतिक चीजों को सजाकर रखा जिसे लेकर वह सेल्फी ले सकें। मैं चाहती हूँ कि मेरा समाज भी अन्य समाज की तरह आगे आये और उनकी भी अलग पहचान बने। ऐसी स्थिति में मुझे एक ही तरीका समझ में आया कि वर्षों से चला आ रहे भगोरिया हाट जिसकी पूरे विदेश में एक अनोखी पहचान है। मुझे इसे अच्छा मौका कहीं नहीं मिलेगा।

विलुप्त हो रही सामग्री की लगाई गई प्रदर्शनी व एक युवती दिप्तेश्वरी गुथरे द्वारा बनाया गया सेल्फी पॉइंट | New India Times

यहाँ सभी क्षेत्र के लोग आते हैं। उन्हें एक साथ संस्कृति संरक्षण के प्रति जागरूकता का भाव पैदा किया जा सके। इसी दौरान मैंने तीन – चार महीनों से लगातार मेहनत की जिस तरह से हो सके अपनी पुरानी सांस्कृतिक चीजों का संरक्षण करना शुरू किया और कुछ चीजों को हाथों से बनाया और सजाया। सभी सामग्रियों को एकत्रित कर प्रदर्शनी का रूप दिया और समाज को समझाने का तरीका आसान हुआ।
मेरी प्रदर्शनी को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आये वह सभी हमारी सांस्कृतिक चीजों को देखकर बहुत खुश हुए। मेरी प्रदर्शनी को देखने के लिए जोबट एस. डी. एम. देवकी नंदन सिंह, तहसीलदार आलोक वर्मा, डाॅ. विजय बघेल और बीईओ प्रताप डावर आये। जिन्होंने मेरे द्वारा किए गए इस कार्य की सराहना की व पंसद व्यक्त की मेरे द्वारा बनाए गए गमछे भेंट किए गए। मुझे मेरे इस कार्य पर गर्व है और मैं बहुत खुश हु कि मुझे मेरे समाज को ऊपर उठाने का इस प्रकार अवसर मिला।
मैंने सांस्कृतिक चीजों को बेचने का स्टाल भी लगाया जिससे कि बाहर से आने वाले लोग सांस्कृतिक चीजों को लेकर जायें व अपने क्षेत्र में बताएं।

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