अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

कोरोना कर्फ्यू के चलते अधिकतर लोगों के व्यवसाय बंद हैं जिससे गरीब, मज़दूर एवं असहाय लोगों के सामने खाने पीने का संकट खड़ा हो चुका है। ऐसे में शिवराज सरकार ने तीन माह के राशन का एलान किया है पर सरकार को यह ज्ञात भी होना चाहिए कि राशन में सिर्फ गेहूं बाजरा नहीं होता अन्य सामग्री भी होती है। लोगों का कहना है कि ऐसे में ग़रीब निर्धन आर्थिक संकट झेल रहे परिवार क्या पानी मे घोल कर खाएंगे???
वहीं एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कंट्रोल की दुकानों पर गेहूं, बाजरा, चावल भी पूरी मात्रा में ज़रूरतमंदों को नहीं दिया जा रहा है जिसकी ओर मध्यप्रदेश सरकार को ध्यान देने की ज़रूरत है। वहीं जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के प्रेस सचिव हाजी मोहम्मद इमरान का कहना है कि जब छोटी छोटी सामाजिक संस्थाएं तेल चावल, दाल, चाय पत्ती सहित अन्य चीज़ें ज़रूरतमंदों में वितरण कर रही हैं तो प्रशासन क्योंं नहीं दे रहा है।
यह अफसोस की बात है कि ऐसी आपदा में भी ज़रूरतमंदों को बीपीएल कार्ड होने के पश्चात भी कोई फायदा नहीं हो रहा है। सरकार को यह ज्ञात होना चाहिये कि सिर्फ गेंहू, चावल, बाजरा से पेट नहीं भरते, राशन सामग्री में गेहूं चावल की जगह आटा, चावल, तेल, चाय पत्ती, दाल आदि चीज़ें सरकार को उपलब्ध करवाना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि वर्षों पूर्व सरकारी कंट्रोल की दुकानों में साधारण राशन कार्ड वालो को भी हर चीज़ कंट्रोल पर मिलती थी. गेहूं, चावल, शक्कर, तेल, नमक आदि पर गरीबी रेखा का कार्ड बनने के पश्चात यह तमाम चीज़े बन्द हैं।
हाजी इमरान ने कोरोना काल को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि विधवा पेंशन में बढ़ोतरी करना चाहिए जिससे विधवा महिलाओं को सहारा मिल सके, इस मंहगाई के दौर में भी विधवा महिलाओं की पेंशन सिर्फ 350 रुपये है जो आर्थिक संकट दूर करने के लिए काफी नहीं है। वहीं कोरोना काल में बीपीएल कार्ड धारकों को हरी सब्जियों को उपलब्ध कराने पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।
