मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

कोरोना या किसी भी संक्रमण से क्षतिग्रस्त अंगों को आयुर्वेद और योग प्राणायाम से ठीक किया जा सकता है इसमें फेफड़े समेत अन्य प्रभावित अंग भी शामिल है पोस्ट कोविड-19 में फेफड़े ,हृदय, आंख ,नाक, के अलावा सिरदर्द, ब्लड प्रेशर की समस्या होती है मरीजों के उपचार की शरीर शुद्धीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है इसमें पंचकर्म, क्रियाकल्प के अलावा कार्य चिकित्सा की जाती है आंख नाक व कान का इलाज सालक्य के तहत किया जाता है इसके तहत पौष्टिक खानपान व आचार व्यवहार के साथ-साथ योग कराया जाता है अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु डॉ प्रकाश टाटा ने वर्तमान परिवेश में चल रहे रोगों को लेकर लोगों को मार्गदर्शन दिया है। योग गुरु डॉक्टर टाटा ने आगे कहा कि फेफड़े व हृदय के ऊपर कटोरी नुमा आकृति बनाकर उसमें गर्म तेल डालकर सिकाई की जाती है इसके अलावा दोनों अंगों के ऊपर कुछ लेप लगाकर छोड़ दिया जाता है विशेषज्ञ उन्हें अपनी देखरेख में दवा देते हैं इसके अलावा भ्रामरी अनुलोम-विलोम व भ्रातिका जैसे सांस व्यायाम कराया जाता है. संक्रमण से यदि आंखों की रोशनी कम होती है तो 70 फ़ीसदी लौटाने में कामयाबी मिलती है. ब्लैक फंगस के रोगी भी यदि शुरुआत में आते हैं तो उन्हें भी काफी लाभ होता है इसके लिए क्रिया कल्प के तहत तर्पण व त्राटक विधि उपयोगी है. तर्पण विधि से आंखों के आसपास त्रिफला चूर्ण डाला जाकर इसमें आंखों की रोशनी लौटाने में मदद मिलती है वहीं त्राटक विधि के तहत घी के दीए जलाकर उन्हें अलग-अलग दिशाओं में रखा जाता है इसके बाद रोगी को उसे एकटक देखने को कहा जाता है इससे आंखों की पुतली चारों ओर घूमती है।
धैर्य संयम बरतें घर पर उपचार करें
अंतरराष्ट्रीय योग गुरु डॉक्टर प्रकाश टाटा ने इस संबंध में बताया कि इसके अतिरिक्त नस्य क्रिया से ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण में लाभ देखा गया है नाक में तेल व घी डालने के साथ कई बार भाप और औषधि जड़ी बूटियों का धुआं देने से बंद नाक खोलने के साथ ही कई संक्रमण खत्म हो जाते हैं वही शिरोधारा क्रिया के द्वारा माथे पर तेल घी की धारा डालने व दवाओं के लेप से सिर दर्द ब्लड प्रेशर नींद ना आना की समस्या दूर होती है इस दौरान कोविड-19 के चलते डॉक्टर टाटा के द्वारा निशुल्क दवा वितरण पूरे भारत में किया जा रहा है इसके अलावा देश-विदेश में भी लोगों को मार्गदर्शन दिया जा रहा है एवं उन्होंने कहा कि इस महामारी में सबसे बड़ी बात यह है कि आप धैर्य संयम के साथ घर पर रहकर ही उपचार करें तथा शारीरिक दूरी सोशल डिस्टेंसिंग व भीड़ से बच्चे निश्चित हि यह विषम परिस्थिति को आप परास्त कर पाएंगे।
