अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

कोरोना संक्रमण के कारण आम मध्यम वर्ग परिवार एवं रोजाना कमाकर खाने वालों पर ज़बरदस्त मार पड़ी है। ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे है जिसमें संक्रमण के बाद आम लोगों को गंभीर परिस्थितियों का सामाना करते हुए अपने जीवन मरण की लड़ाई लडऩा पड़ रही है। जिन परिवारों में नौकरी पेशा लोग हैं वह तो अपना जीवन यापन अच्छी तरह से कर रहे हैं क्योंकि उन्हें नियत तारीख पर सरकार की ओर से वेतन प्राप्त हो जाता है साथ ही व्यापार एवं उघोग धंधे मे लगे बड़े व्यवसायियों पर भी कोरोना संक्रमण का कोई खास असर नहीं पड़ा है। देखा जाए तो इस सीजन का उनका सिर्फ टर्नओवर ही गड़बड़ाया है जबकि कोरोना संक्रमण ने मध्यम वर्ग एवं उससे नीचे की रेखा में जीवन यापन करने वाले आम लोगों का जीवन चक्र ही गड़बड़ा दिया है। जनजीवन अस्त व्यस्त है, महामारी के कारण सभी व्यवसाय ध्वस्त हो चुके हैं। लोग इस कदर संकट में घिरे हैं कि खाने के लाले पड़ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि ऐसे स्तिथि में परिवार का पेट भरने के लिए आज भोपाल में महिलाएं अपना शरीर बेचने के लिए मजबूर हैं जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इसलिए अब ऐसे परिवार के लोग भगवान से आस लगाकर बैठे हैं कि शीघ्र ही स्थितियां ठीक हों और वह पूर्व की भाति अपना जीवन यापन करने लगें।
