संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

गोपाल किरण समाज सेवी संस्था द्वारा संविधान निर्माता भारत रत्न डाॅ बाबासाहब आंबेडकर की 128 वीं जयंती को विश्व ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया।
गोपाल किरण समाज सेवी संस्था द्वारा ग्वालियर में पहली बार साप्ताहिक प्रोग्राम भारतीय संविधान के शिल्पकार, आधुनिक राष्ट्र निर्माता, पीड़ित मानवता के मसीहा, विश्व का ज्ञान दीप सिम्बल आफ नाॅलेज चैंपियन आफ सोशल जस्टिस भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर जी के जन्मदिन पर किये जा रहे है प्रोग्राम के पहले दिवस महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस पर सुजाता बुध्द विहार थाटीपुर, ग्वालियर में जयंती धूमधाम से मनाई गई। दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि 21वीं सदी डॉ. भीमराव अंबेदकर जी की होगी। संविधान की प्रस्तावना, जनतांत्रिक संघीय धर्मनिरपेक्ष समाजवादी गणराज्य आधार पर जनता सर्वोपरि है। संविधान के आधार पर देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता, समानता, न्याय और इज्जत के साथ जीने की संवैधानिक गारंटी है। संवैधानिक अधिकार दिलाने में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान था। डॉक्टर अंबेडकर ने जहां एक तरफ मनुवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए मनुस्मृति को जलाया वहीं राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक बराबरी के लिए निरंतरता में संघर्ष किया।
उन्होंने बाबा साहब के अनमोल विचारों पर बताया कि
“मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्छा है, मेरे बताए हुए रास्ते पर चलो। उन्होंने
“रात रातभर मैं इसलिये जागता हूँ क्योंकि मेरा समाज सो रहा है।”
“जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, वह कौम कभी भी इतिहास नहीं बना सकती।”
“अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।”
“मैं राजनीति में सुख भोगने नहीं बल्कि अपने सभी दबे-कुचले भाईयों को उनके अधिकार दिलाने आया हूँ।”
“मनुवाद को जड़ से समाप्त करना मेरे जीवन का प्रथम लक्षय है।”
“जो धर्म जन्म से एक को श्रेष्ठ और दूसरे को नीच बनाए रखे, वह धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है।”
“राष्ट्रवाद तभी औचित्य ग्रहण कर सकता है, जब लोगों के बीच जाति, नस्ल या रंग का अन्तर भुलाकर उसमें सामाजिक भ्रातृत्व को सर्वोच्च स्थान दिया जाये।”
“मैं तो जीवन भर कार्य कर चुका हूँ अब इसके लिए नौजवान आगे आए।”
“अच्छा दिखने के लिए मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ!”
“जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका भी सकता है!”
“लोकतंत्र सरकार का महज एक रूप नहीं है।”
“एक इतिहासकार, सटीक, ईमानदार और निष्पक्ष होना चाहिए।”
“संविधान, यह एक मात्र वकीलों का दस्तावेज नहीं। यह जीवन का एक माध्यम है।”
“किसी का भी स्वाद बदला जा सकता है लेकिन जहर को अमृत में परिवर्तित नही किया
“न्याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है।”
“मन की स्वतंत्रता ही वास्तविक स्वतंत्रता है।”
“इस दुनिया में महान प्रयासों से प्राप्त किया गया को छोडकर और कुछ भी बहुमूल्य नहीं है।”
“ज्ञान व्यक्ति के जीवन का आधार हैं।”
“शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवशयक है उतनी ही महिलाओं के लिए।”
“शिक्षा शेरनी का वो दूध है जो पीयेगा वो गुर्राये से प्रेरणा लेने का आहवान किया । रामप्रसाद Basediya संबोधित करते हुए कहा कि
मौजूदा दौर में संविधान की बुनियाद को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। न्यायपालिका तक में हस्तक्षेप किया जा रहा है। संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं को नकारा जा रहा है।
विरोध की आवाज को देशद्रोह के नाम पर दबाया जा रहा है। शिक्षा, संपत्ति ,भूमि व्यवसाय और रोजगार से बंचित करोड़ो भारतियों को उनके हक एवं मौलिक अधिकार दिलाने वाले तथा हजारो साल से शोषित समाज व महिलाओं को सम्मान शिक्षा रोजगार में भागीदारी दिलाने वाले विश्व ज्ञान के प्रतीक, बोधिसत्व भारत रत्न बाबा साहब डा•भीम राव अम्बेडकर की वजह से संभव हो सका है ।
जहाँआरा ने कहा ,कभी मंदिर-मस्जिद, कभी गौरक्षा, कभी लव जिहाद, कभी इलाका तो कभी जाति के नाम पर जनता को दंगों की भट्टी में धकेला जा रहा है। महिलाओं, दलितों, वंचित तबको पर निरंतर हमले बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि गरीबों का हक उन्हें दिलाया जाएग .
अपील है कि 13 और14 अप्रैल हम दीवाली की तरह मनाए क्योंकि 14अप्रैल बाबा साहब अम्बेडकर का जन्म दिवस है। बाबा साहब द्वारा लिखे संविधान के वजह से ही देश की समस्त महिलाओं, अजा अजजा पिछड़ा,घुमंतू समुदाय, अल्पसंख्यक समुदाय हम सबको संविधान के माध्यम से समस्त मानव अधिकार प्राप्त हुए । पढ़ने लिखने, नौकरी करने,खेती करने, व्यापार उद्योग करने, वोट देने, अपनी सरकार खुद बनाने के अधिकार प्राप्त हुए। इसलिए हम अम्बेडकर जयंती पुरे हर्षोल्लास के साथ दीवाली की तरह मनाए, अपने घरों को सजाए, उस पर रोशनाई करे, पटाखे फोड़े, घरों के आंगन में रंगोलियां बनाए। इस के साथ संभव हुआ तो अपने नगर, मुहल्ले में बुद्ध वन्दना करे, एक दूसरे से गले मिले, जय भीम के नारे लगाए, बाबा साहब अम्बेडकर की किताबें भेट करे। आप स्वयं भी इसे करे और अपने सभी दोस्तों साथियों को भी अम्बेडकर जयंती को पूरे उत्सव की तरह मनाने के लिए प्रेरित करे। और उनके जयंती के अवसर पर इस तरह के आयोजन लगभग पूरे महीने और उमके जयंती के अवसर चलते रहना चाहिए गोपाल किरण समाज सेवी संस्था ने पहली बार पूरे सप्ताह प्रोग्राम किया जा रहा है हमको डॉ.अम्बेडकर के
बताये मार्ग पर चलना होगा ।उनके जीवन से प्रेरणा लेने होगी बाबा साहब ने समाज मे जाति और धर्म के खाई को पत्रकार ने सबको बराबरी में लाने और देश को आगे बढ़ाने का मंत्र दिया ।उत्तम सिंह ने समाज के विकाश के लिए शिक्षा को अपनाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने पर बल दिया ।तत्पश्चात यहां से मुख्य मार्ग पर बाबा साहब अंबेडकर जी की शोभायात्रा निकाली गई
यह चल समारोह विभिन्न बस्तियो के मुख्य मार्ग पर बाबा साहब अंबेडकर जी की शोभायात्रा निकाली गई, समारोह कबीर कॉलोनी सुरेश नगर भगवान कॉलोनी,जगजीवन नगर होते हुए बुद्ध विहार पर समाप्त हुआ । बच्चे डॉ. अम्बेडकर के जीवन दर्शन के संबंध में नारे लगाए गए।
राधा सैनी ने पे बेक टू सोसायटी के महत्व को घर – घर मजबूती प्रदान करने के लिए अपना योगदान दें,इसी प्रकार डॉ. अम्बेडकर पार्क डॉ.अम्बेडकर कालोनी सबल गढ़ मुरैना में भी मनाई गई इन कार्यक्रम शुभम सिंह, नरेंद्र चौधरी पंकज नागर ,सबा राम मौर्य, भरतेंदय चौधरी ,आनंद सामले नागपुर, निष्ठा सिंह, राय सिंह, देवेंद्र सिंह (सकराया भिंड),उत्तम सिंह नरेलिया ,सुजाता बौद्ध ,योगेन्द्र सिंह पारस रामप्रकाश कतरोलिया,ज्ञानसिंह, सरोज पवैया ,राधा सैनी, भन्ते जी,आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये और बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने का आहवान किया ।
और कहा कि,
हमेशा स्मरण रहे कि अम्बेडकर जयंती मात्र एक जन्मदिवस ही नहीं हैं बल्कि यह दिन हमें सिखाता हैं-
– उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास करना।
-अपने अधिकार पाने के लियें संघर्ष करना।
-उद्देश्य प्राप्ति के लिए संघठित रहना
-अंधविश्वास के प्रति जागरुक होना।
-कठिन परिश्रम करना।
-जुल्म या शोषण के खिलाफ आवाज उठाना।
-निरन्तर प्रगतिशील रहना।
-दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना।
-नशे से दूर रहना।
-चरित्रवान रहना।
-अपने आपको सामाजिक कार्यों से जोड़े रखना।
-महिलाओं का सम्मान करना।
-बुजुर्गों एवं माता पिता की सेवा करना
-बेटा और बेटी मे कोई भेद ना करना।
-दहेज प्रथा, मृत्यु भोज ,भृष्टाचार तथा भ्रूण हत्या जैसी बुराई से अपने आपको दूर रखना।
-स्वच्छ राजनीति मे हिस्सेदारी रखना।
-पंचशील का पालन करना।
-22 प्रतिज्ञाओं का पालन -मृदुभाषी एवं अच्छा व्यक्तित्व बनाये रखना।
-संविधान का सम्मान करना।
-व्यक्तित्व और पहनावे मे शालीनता रखना
-छल ,कपट,ईर्ष्या,, द्वेश तथा किसी भी प्रकार के अपराध से विरक्त रहना।
तो साथियों बाबा सहाब डा0 भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती को सौहार्दपूर्ण आयोजित करना और ज्यादा सार्थक हो जायेगा यदि हम सब उपरोक्त बिन्दुओं का मन से और वचन से अनुसरण करें जिसमें नगर के सम्मानीय जन प्रतिनिधिगण माता बहने और युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थित थी। यहां लोगों ने बाबा साहब अंबेडकर जी को पुष्पहार पहनाये, तत्पश्चात सभी लोगों का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन हुआ।
