अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:
राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, हिमाचल, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, उडीसा व दिल्ली राज्य में कांग्रेस पार्टी कभी कभार दिल्ली या फिर राजस्थान में एक सीट पर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार अब तक बनाती रही है लेकिन दो महीने बाद होने वाले आम लोकसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम को उम्मीदवार कथित मुस्लिम नेताओं की कमजोरी व सौदेबाजी के चलते नहीं बनाने का तय कर लिया जाना बताया जाता है।
मुकाबले में दांव खेलने से पहले हार मानने के आदत के धनी राजस्थान कांग्रेस के बडे मुस्लिम नेताओं ने खुद आगे आकर हाईकमान व अपने वरिष्ठ नेताओं से मिलकर कहा है कि मौजूदा हालात व पूलवामा में जवानों के शहीद होने के बाद बन रहे राजनीतिक स्थिति में मुस्लिम उम्मीदवार का चुनाव जीतन मुश्किल है इसलिए ऐसे हालात में मुस्लिम को लोकसभा उम्मीदवार ना बना कर उसे राज्यसभा में उम्मीदवार बनाकर सांसद बना दिया जाना सबसे बेहतर रास्ता होगा। इसके विपरीत कांग्रेस के कुछ सेक्युलर सीनियर नेताओं ने कहा है कि कैप्टन अय्युब खां दो बार लोकसभा चुनाव जीत चुका है तो किसी कायमखानी को शेखावाटी जनपद से चुनाव लड़वाना चाहिए ताकि कम से कम 9 राज्यों में से एक सीट पर उम्मीदवार उतारने की चुनावी प्रचार के समय कहा जा सके।व वरना टिकट देने मे भाजपा व कांग्रेस में समानता की बातें विरोधी दल करने लगेंगे। वैसे भी राजस्थान में सभी 25 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों के जीतने की गारंटी नहीं है।
उम्मीदवार चयन को लेकर दिल्ली व उक्त 9 राज्य की राजधानियों में कांग्रेस पार्टी की अनेक स्तर पर चली मेराथन बैठकों के बाद जब यह लगने लगा कि काग्रेस उक्त नौ राज्यों मे से एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार राजस्थान में उतार सकती है तो राजस्थान में विधानसभा का चुनाव हार चुके व टिकट से वंचित रहे नेताओं के अलावा अधिकांश विधायक व पूर्व राज्यसभा सदस्यों ने जयपुर से दिल्ली तक दौड़ लगाकर कांग्रेस नेताओं को यह समझाने में कामयाब हो गये कि किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार के जीतने की सम्भावना कतई नहीं है इसलिये मुस्लिम को लोकसभा का टिकट ना देकर किसी मुस्लिम को राज्यसभा में उम्मीदवार बनाकर उसे सांसद बनाया जाये। राजस्थान में मौजूदा विधानसभा में आठ मुस्लिम विधायकों मे से एक मात्र कायमखानी विधायक उक्त राजनीतिक घटनाक्रम से अनभिज्ञ होकर झूंझुनू से राजबाला ओला को टिकट दिलवाने में पूरा दम लगा रखा है।
राजस्थान कांग्रेस के एक सीनियर मुस्लिम नेता ने बताया कि विधायकों को लोकसभा में उम्मीदवार नही बनाने का राजस्थान मे तय होने के बाद उनका इंटरेस्ट इस तरफ कम हो गया एवं इसके अतिरिक्त राज्यसभा का मजा चख चुके दो मुस्लिम नेताओं में से एक विधानसभा चुनाव हार गये एवं दूसरे नेता को टिकट नहीं मिला तो अब वो भी मुस्लिम को लोकसभा टिकट ना देकर राज्यसभा देने का राग बडी ताकत के साथ हर स्तर पर अलापने मे काफी सक्रिय बताए जा रहे है। दूसरी तरफ लोकसभा की टिकट की दोड़ मे शामिल एक मुस्लिम नेता ने बताया कि लोकसभा की पच्चीस सीटों में से एक व राज्यसभा की दस सीटों में अलग से एक सीट मुस्लिम को मिलना उसका राजनीतिक अधिकार है।
अवल तो मौजूदा राजनीतिक हालात में निरंतर होते बदलाव व उक्त नौ राज्यो मे सीधा मुकाबला होने के चलते मुस्लिम मतो का कांग्रेस खुद अपनी तरफ पूख्ता आना मानकर अब कांग्रेस सोफ्ट हिंदुत्व का रास्ता अपनाकर बहुसंख्यक मतो को अधिकाधिक तादाद में अपनी तरफ खींचकर भाजपा की चाल से भाजपा को मात देना चाहती है। उपर से राजस्थान के मुस्लिम नेताओं ने मुस्लिम को उम्मीदवार नही बनाने की हाईकमान तक अपनी बात पहुंचा कर कांग्रेस की बनी नीति को खाद व पानी देने का काम किया है। जबकि कुछ कमजोर पर इरादों के मजबूत मुस्लिम नेता आज भी कांग्रेस हाईकमान के सामने एक मुस्लिम उम्मीदवार बनाने की जमकर वकालत करके चेतावनी दे रहे हैं।
कुल मिलाकर यह है कि 9 राज्यों मे से एक मात्र राजस्थान से कांग्रेस एक मुसलमान को 1984 से अब तक लगातार उम्मीदवार बनाती आ रही है। जबकि अबके उक्त सभी नौ राज्य में कांग्रैस की तरफ से मुस्लिम उम्मीदवार मीलने से समुदाय महरुम रह सकता है। मुस्लिम समुदाय की ऐसी राजनीतिक बूरी गत बनने के असल जिम्मेदार हमारे मुस्लिम कांग्रैस नेताओं के साथ साथ मुस्लिम समुदाय खुद भी है जो ऐन वक्त पर बीना कुछ पाये व तय किये भावनाओं मे बहकर एक दल के निशान को दबाकर अपना मत दे आता है।
