सरवर खान ज़रीवाला, भोपाल, NIT;
बीजेपी सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री और मणिपुर के प्रभारी प्रहलाद पटेल ने तीन ट्वीट के जरिए सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। ट्विट में किसी का नाम लेते हुए उन्होंने जो सवाल खड़े किए हैं उसका जवाब देने से बीजेपी बगलें झांकने पर मजबूर हो गई है और कोई भी जवाब देने से बचती नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विवादित टिप्पणी करने का जोखिम कम से कम कोई राजनेता तो नहीं लेगा लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कार्यवाहियों की समीक्षा की आवश्यकता जताते हुए प्रहलाद पटेल ने चिकित्सा के क्षेत्र में तीन पीढ़ियों के प्रभावित होने की ओर ध्यान आकर्षित किया है और साथ ही लगे हाथों यह भी साफ कर दिया है कि न्यायालय के फैसले से हम न तो खुश हो सकते हैं और न दुख व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि उन्हें भी वास्तविक अपराधियों को सजा मिलने का इंतजार है। एक मंझे हुए नेता के तौर पर प्रहलाद पटेल ने जो कुछ कहा है उसने सिस्टम पर सवाल खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। विद्यार्थियों की संदिग्ध भूमिका की सजा उन्हें मिल जाने के बावजूद वह वास्तविक अपराधियों की ओर समाज का ध्यान आकर्षित करने की मंशा रखते हैं।
प्रहलाद पटेल को अच्छी तरह मालूम है कि व्यापम को लेकर सीबीआई जांच चल रही है और सरकार खुद को श्रेय दे रही है कि उसकी समय रहते सजगता के चलते ही यह पूरा मामला उजागर हुआ और किसी भी दोषी को यह उम्मीद नहीं पालना चाहिए कि वह जांच एजेंसी को झांसा दे पाएगा और न्यायालय की नजर से बच पाएगा। व्यापम की व्यापक जांच के बावजूद यदि सवाल प्रहलाद पटेल द्वारा राजनीतिक इच्छाशक्ति को लेकर खड़ा किया गया है तो फिर निशाने पर कोई और नहीं बल्कि प्रदेश सरकार और उसके मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान ही आते हैं जिन्होंने हमेशा खुद को व्हिसिल ब्लोअर बताकर इस पूरे मामले की जांच को एक नई दिशा देने का श्रेय लिया है।
