सरवर खान जरीवाला, भोपाल, NIT;
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश में शराब की दुकानों के बगल में खोले गये अहाते बंद करने की घोषणा की है जबकि उनके ही कैबीनेट के वरिष्ठ मंत्री जयंत मलैया कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है, मंत्रीमंडल में विरोधाभास की यह स्थिति हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि शराब के अहाते बंद होंगे या नहीं?
अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में लगभग तीन हजार शराब की दुकानों को बगल में अहाता खोलने के ठेके दिये गये हैं। बता दें कि अहाता वह जगह है जहां लोग दुकान से शराब खरीदकर बगल में ही पीने बैठ जाते हैं। अहातों के बाहर लिखा रहता है ‘‘बैठकर पीने की उत्तम व्यवस्था।’’ मलैया के बयान से अब भ्रम फैल गया है कि शिवराज सरकार में चल रही ‘‘बैठकर पीने की उत्तम व्यवस्था’’ जारी रहेगी या बंद की जायेगी। अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब की दुकान खोलने के कारण उसके आसपास के रहिवासी शराबियों की हरकतों से अच्छे-खासे परेशान हैं। खासकर बच्चियां और महिलाऐं तो सबसे अधिक नाराज हैं। सरकार को शर्म आनी चाहिए कि मंदिरों और स्कूल-कॉलेजों के आसपास शराब की दुकानें ऐसे खोल दी गई हैं, जैसे वे किसी कंपनी के शो-रूम हों। क्या यह स्थिति आनंद मंत्रालय बनाने वाली सरकार को नहीं दिखती है?
अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि प्रदेश में अब शराब की कोई नई दुकान नहीं खुलेगी। मेरा स्पष्ट कहना है कि बात नई और पुरानी शराब दुकानों की नहीं हो रही है बल्कि बात हो रही है कि शराब की दुकानें सार्वजनिक स्थानों पर न खोलने की। मुख्यमंत्री ऐसा बोलकर विषयांतर करते हैं और दुकान हटाने का भ्रम पैदा करते हैं। प्रदेश में जगह-जगह से शराब दुकानें हटाने के लिए महिलाओं द्वारा आंदोलन किये गये हैं लेकिन उनकी एक भी बात नहीं सुनी जा रही है।
