पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा, सिवनी/छपारा (मप्र), NIT;

सुरीली और सुकून भरी खनक वाले सिक्के अब बाजार में परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। नोटबंदी के बाद से बाजार में 1, 2, 5 तथा ₹10 के सिक्कों की इतनी भरमार है कि हर कोई इन्हें लेने से कतराने लगा है। छपारा में स्थित आधे दर्जन बैंक भी छोटे व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं से सिक्के लेने में आनाकानी कर रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि बड़े व्यापारियों के साथ इन बैंकों की सांठगांठ के चलते सिर्फ और सिर्फ छोटे व्यापारियों तथा बैंक के आम खातेदारों को ही परेशान किया जा रहा है और बड़े व्यापारियों से बड़ी मात्रा में बैंक प्रबंधन सिक्के जमा करा कर बड़े धन्नासेठ व्यापारियों को ही फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छपारा नगर में स्थित आधा दर्जन से अधिक विभिन्न बैंकों के प्रबंधन की मनमानी के चलते छोटे व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं को सिक्के जमा करने में भारी मशक्कत करना पड़ रहा है। वही बैंक प्रबंधन इन शिकायत को निराधार बता रहे हैं। इन बैंकों के प्रबंधन का कहना है कि प्रत्येक खातेदार से हर दिन ₹1000 तक के सिक्के बैंक जमा करवा रही है। लेकिन जब मीडिया में की टीम ने छोटे व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं से चर्चा की तो बैंक प्रबंधन के झूठ का पर्दाफाश हो गया। छोटे व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं ने यह बताया कि वे आए दिन विभिन्न बैंकों में सिक्के जमा करने तो जाते हैं लेकिन बैंक प्रबंधन इन सिक्कों को लेने से आनाकानी करते हैं और अगर किसी तरह जमा करने को प्रबंधन तैयार भी होता है तो नित नए बहाने के साथ-साथ यह कहा जाता है कि 10 हजार रुपए में सिर्फ ₹1000 के सिक्के जमा किए जाएंगे।
आरबीआई की गाइड लाइन को ठेंगा दिखा रहे हैं बैंक
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की कई कोशिशों और बार बार उनकी वैधता का स्पष्टीकरण देने के बाद भी छपारा के विभिन्न बैंक सिक्के सहजता से स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे दुकानदारों की है उन्हें सिक्के देने को सब तैयार हैं लेकिन लेने को कोई नहीं। बाजार में सिक्कों की बड़ी संख्या में खपाने का एकमात्र जरिया बैंक है। लेकिन सिक्कों को गिनने उन्हें रखने में परेशानी की वजह से बैंक प्रबंधन इन्हें लेने में आनाकानी करते हैं।
आरबीआई ने किए नए सर्कुलर जारी
आम जनता से जुड़ी यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि आरबीआई ने 15 फरवरी को फिर एक गाइडलाइन जारी कर बैंकों को आगाह किया है। इसमें जुलाई 2017 में जारी मास्टर सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा गया है कि बैंक की कोई भी शाखा छोटे नोट अथवा सिक्के स्वीकार करने से इंकार नहीं कर सकती। आरबीआई ने बैंकों को उपाय भी सुझाएं हैं कि एक और दो रुपए सिक्कों को गिनने में परेशानी हो तो वजन के हिसाब से इन सिक्कों को लिए जा सकते हैं।
