बीच-बचाव करना युवक को पड़ा भारी, वीडियो साक्ष्य के बावजूद झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप; एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग | New India Times

संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

बीच-बचाव करना युवक को पड़ा भारी, वीडियो साक्ष्य के बावजूद झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप; एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग | New India Times

अमानगंज निवासी सतीश उर्फ गोलू लहगेरे ने पुलिस अधीक्षक पन्ना को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि आकाश कोरी को मारपीट से बचाने और बीच-बचाव करने के कारण उनके विरुद्ध थाना अमानगंज में झूठा प्रकरण दर्ज कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने तथा घटना का वीडियो विवेचना में शामिल करने की मांग की है।

बीच-बचाव करना युवक को पड़ा भारी, वीडियो साक्ष्य के बावजूद झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप; एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग | New India Times

आवेदन के अनुसार, 12 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:30 से 5:00 बजे फुव्वारा चौक (गांधी चौक) स्थित विनय खटीक की दुकान पर उन्होंने देखा कि प्रियंका कोरी, अस्मिता कोरी, सृष्टि कोरी, कमला बाई कोरी और जयप्रकाश कोरी मिलकर आकाश कोरी के साथ मारपीट कर रहे थे। आकाश कोरी द्वारा बचाने की गुहार लगाने पर जब सतीश ने बीच-बचाव किया, तो आरोप है कि उक्त लोग उनके साथ भी मारपीट करने के लिए झपट पड़े। इस दौरान उनकी शर्ट और बनियान फट गई तथा उन्हें लगभग दो हजार रुपये का नुकसान हुआ।

आवेदन में कहा गया है कि घटना के दौरान मौजूद विनय खटीक, रवि वर्मन, महेश भट्ट सहित अन्य लोगों ने उन्हें छुड़ाया और पूरी घटना देखी। इसके बाद वे थाना अमानगंज शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके विपरीत, उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया।

सतीश लहगेरे का आरोप है कि पूरी घटना का वीडियो रवि वर्मन ने अपने मोबाइल से बनाया था, जिसकी पेन ड्राइव उन्होंने पुलिस अधीक्षक को सौंपी है। उनका कहना है कि तत्कालीन थाना प्रभारी रवि जादौन को भी घटना का वीडियो दिखाया गया था और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद उनके विरुद्ध झूठा प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

आवेदन में थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रत्यक्ष वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद किसी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाता है, तो इससे पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं और भविष्य में लोग किसी विवाद में बीच-बचाव करने से भी डरेंगे।

आवेदक ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए, घटना के वीडियो को विवेचना का हिस्सा बनाया जाए तथा उनके विरुद्ध दर्ज कथित झूठे प्रकरण को समाप्त किया जाए। आवेदन की प्रति पुलिस महानिदेशक, भोपाल को भी भेजी गई है।

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