बालिग युवती ने अपनी मर्जी से की शादी, परिजनों से खतरा बताकर एसपी से मांगी सुरक्षा | New India TimesOplus_131072

वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

बालिग युवती ने अपनी मर्जी से की शादी, परिजनों से खतरा बताकर एसपी से मांगी सुरक्षा | New India Times

जनपद में एक 20 वर्षीय बालिग युवती द्वारा अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करने के बाद परिजनों से जान का खतरा बताते हुए पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की मांग करने का मामला सामने आया है। युवती ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर अपने पति एवं उसके परिजनों को कथित पुलिस उत्पीड़न से बचाने तथा निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम हथियाबोझ (दरेरी) निवासी युवती ने बताया कि उसने 26 अगस्त 2026 को प्रमिला नगर, देवकली रोड, लखीमपुर खीरी निवासी किशन बाबू से अपनी मर्जी से गायत्री परिवार मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। इसके बाद दोनों ने कोर्ट मैरिज भी की। युवती का कहना है कि उसने यह निर्णय बिना किसी दबाव, भय या बहकावे के लिया है। विवाह के संबंध में दोनों पक्षों द्वारा सहमति एवं अनुबंध पत्र भी तैयार कराया गया है।
पति के परिजनों को परेशान करने का आरोप
युवती का आरोप है कि प्रेम विवाह से उसके मायके पक्ष के लोग नाराज हैं। उनके द्वारा पुलिस में शिकायत किए जाने के बाद किशन बाबू के माता-पिता और रिश्तेदारों को पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया जा रहा है। युवती ने स्पष्ट किया कि उसके विवाह में पति के परिजनों की कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
युवती ने विवाह प्रमाणपत्र, फोटो और सहमति पत्र को पुलिस रिकॉर्ड में शामिल करने तथा उसके स्वेच्छा से दिए गए बयान को आधार मानकर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उसने पति के परिवार को बिना निष्पक्ष जांच के किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बचाने की अपील की है।

रात में पुलिस दबिश को लेकर उठे सवाल

वहीं, किशन बाबू के पिता बहादुर लाल ने आरोप लगाया कि 15 सितंबर की रात करीब एक बजे पड़ुवा थाने की पुलिस उनके प्रमिला नगर स्थित घर पहुंची और गेट तोड़ने का प्रयास करते हुए दबिश जैसी कार्रवाई की। उनका कहना है कि जब पुलिस से कार्रवाई का कारण तथा न्यायालय का आदेश अथवा वारंट दिखाने को कहा गया तो मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
बहादुर लाल के मुताबिक, उन्होंने पूर्व में थाना कोतवाली सदर, पुलिस अधीक्षक तथा पड़ुवा पुलिस को लिखित रूप से अवगत कराया था कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और उन्हें परेशान न किया जाए। इसके बावजूद रात में पुलिस कार्रवाई से परिवार के छोटे बच्चों में भय का माहौल पैदा हो गया।
घटना की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा मीडिया को दिए जाने के बाद पत्रकार मौके पर पहुंचे। बहादुर लाल का आरोप है कि मीडिया द्वारा पुलिसकर्मियों से कार्रवाई का कारण पूछे जाने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि घटना की सूचना रात में ही 112 नंबर पर दी गई, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।
मामले में बहादुर लाल ने पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई आवश्यक है तो उसे नियमानुसार किया जाए, लेकिन बिना स्पष्ट आधार के देर रात घर पर दबिश देकर परिवार को परेशान न किया जाए। मामले में पड़ुवा एवं कोतवाली पुलिस की भूमिका को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

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