कोतमा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का खेल: प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल | New India Times

ओम प्रकाश सोनी, ब्यूरो चीफ, अनूपपुर (मप्र), NIT:

अनूपपुर जिला के कोतमा जनपद क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बिजुरी, कोतमा और भालूमाड़ा थाना क्षेत्रों के अंतर्गत केवई नदी टोलवे मुक्तिधाम के समीप कटकोना और वैहाटोला रेत घाटों से रातभर भारी वाहनों के जरिए अवैध खनिज रेत का उत्खनन, परिवहन और भंडारण बड़े पैमाने पर किए जाने की शिकायत सामने आई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रात के समय 25 से 30 वाहनों के काफिले के साथ आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों में रेत का परिवहन करते हैं। बताया जा रहा है कि इन गतिविधियों में शामिल लोगों के पास वैध दस्तावेज (टीपी) नहीं होते और अधिकांश रेत अवैध रूप से निकाली जाती है।
यह भी आरोप है कि वाहन मालिकों से प्रति रात 3,000 से 5,000 रुपये तक की राशि लेकर परिवहन की अनुमति दी जाती है। इस कथित “एंट्री सिस्टम” के तहत एक बार भुगतान करने के बाद वाहनों को बिना रोक-टोक परिवहन की छूट मिल जाती है।

सूत्रों का कहना है कि अवैध रेत का भंडारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गली-गली किया जा रहा है, जिसे बरसात के मौसम में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। इस कारण शासन को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि रेत खनन के लिए हर वर्ष ई-टेंडर प्रक्रिया भी की जाती है।
मामले में पुलिस, खनिज और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत की भी चर्चा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने और अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रात्रि में रेत घाटों और परिवहन मार्गों का सघन निरीक्षण कर अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि शासन को हो रहे राजस्व नुकसान और क्षेत्र में बढ़ते आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण किया जा सके।

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