इरशाद आलम, परासिया/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
भ्रष्टाचार और एट्रोसिटी एक्ट जैसे गंभीर आरोपों में घिरे परासिया नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर ने जमानत याचिका (प्रकरण क्रमांक 1980/2026) पर सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 9 मार्च 2026 निर्धारित की है। इस न्यायालयीन आदेश के बाद अब मालवीय को अगली सुनवाई तक जेल में ही रहना होगा।
संगीन आरोपों का शिकंजा: भ्रष्टाचार से लेकर आईटी एक्ट तक
विदित हो कि 18 मार्च को चांदामेटा पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद जिला मजिस्ट्रेट, छिंदवाड़ा ने उन्हें एट्रोसिटी एक्ट (SC/ST Act) एवं अन्य धाराओं के तहत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मालवीय पर लगे आरोप न केवल गंभीर हैं, बल्कि कई मामलों से जुड़े हुए हैं:
• कमीशनखोरी के आरोप: ठेकेदारों से विकास कार्यों के बदले 5% से लेकर 50% तक कमीशन वसूलने के आरोप।
• अनुचित मांगें: शराब ठेकेदारों से अनुचित लाभ और अवैध रूप से शराब की मांग करने के आरोप।
• महिला संबंधित मामला: परासिया थाने में एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए आईटी एक्ट के मामले ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भाजपा का बड़ा निर्णय: 6 वर्ष के लिए निष्कासन
इन गंभीर आरोपों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने विनोद मालवीय को प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। संगठन के इस निर्णय और न्यायालय से राहत न मिलने के कारण क्षेत्र की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
न्यायिक सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता और साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित की गई है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें 9 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

