जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई पत्थरबाजी और प्रतिमा खंडित करवाये जाने के मामले में आरएसएस भाजपा अनुषांगिक संगठनों एवं नेताओं की बयान बाजी रुकने का नाम नहीं ले रही। जिससे समाज में विध्वंश फैलाने नफरत के पहाड़ खड़े किए जा रहे हैं। मुसलमान को ऐसी सजा मिले की नजीर पेश की जाए। खुद को कट्टर हिंदू दिखाने की की प्रतिस्पर्धा में बयानबाजी को लेकर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जिसी चौराहे पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने खेल मंत्री विश्वास सारंग और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा से इस्तीफा लेने तथा हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी की गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और तीनों नेताओं के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस घटना को लेकर भाजपा नेताओं ने एकतरफा बयानबाजी की और बिना ठोस सबूत मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि बयानबाजी ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया।
मोहम्मद मास कुरैशी ने कहा कि ‘सरकार मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रामेश्वर शर्मा से इस्तीफा ले और चंद्रशेखर तिवारी को गिरफ्तार करे। आरोप है कि ये लोग लगातार मुसलमानों को निशाना बनाते हैं और समाज में नफरत फैलाने की राजनीति करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूर्ति खंडित मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया, वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। इसके साथ ही, भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयान और प्रशासन की लापरवाही ने मामला और जटिल बना दिया। उनका कहना है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती है तो समाज का भरोसा सरकार और प्रशासन से उठ जाएगा। भोपाल में अलग-अलग संगठन अलग-अलग दल अलग-अलग पंथ के लोग आयुक्त उपायुक्त डीजीपी मध्य प्रदेश पुलिस कमिश्नर पुलिस के माध्यम से ज्ञापन देखकर के लगातार मांग कर रहे हैं कि इन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए अन्यथा आंदोलन को मजबूर होंगे।
भोपाल में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके, जिससे प्रतिमाएं खंडित हो गईं। इस घटना से नाराज लोगों ने गौतम नगर थाने का घेराव कर आरोपियों की तत्काल पहचान और गिरफ्तारी की मांग की जबकि धारा 144 वीएस 163 के बावजूद भी किसी पर कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। पुलिस पर एक बड़ा सवालिया निशान उठना है कि वह सत्ता के चाबी बन गई है। घटना 8 सितंबर सोमवार रात करीब 9:15 बजे हुई। जुलूस आरिफ नगर से डीआईजी बंगला की ओर जा रहा था, तभी किसी ने पत्थर फेंके। इसके बाद लोगों ने चौराहे पर जुलूस रोककर जमकर नारेबाजी की, जिससे सड़क पर जाम लग गया और सैकड़ों वाहन फंस गए।
पुलिस हस्तक्षेप के बाद रोड क्लियर करने के लिए बिना ips144/ vns163 का प्रकरण बनाएं हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन समाप्त किया और रोड खाली करवाया गया। हालांकि, पिछले तीन दिनों से घटनाक्रम लगातार बदल रहा है। पहले दिन पत्थरबाजी और मूर्ति खंडित होने पर FIR दर्ज हुई, दूसरे दिन भाजपा नेताओं ने बयान दिए और शांति बनाए रखने की अपील की। तीसरे दिन पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज में नए तथ्य सामने आए, जिनसे फरियादी की शिकायत और साक्ष्यों में विरोधाभास उजागर हुआ। दरअसल असल मामला यह है कि फरियादी और आरोपी के बीच में पुरानी रंजिश का मामला था। इसी कड़ी में शुक्रवार को मुस्लिम समाज का बड़ा प्रदर्शन हुआ।
खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा था ऐसी सख्त कार्रवाई होगी कि नजीर बनेगी।
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मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, ‘मध्य प्रदेश शांति का टापू है। हर सनातन त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। यदि कोई शांति भंग करने की कोशिश करेगा, तो ऐसी सख्त कार्रवाई होगी कि वह नजीर बनेगी। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और आरोपी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।’
रामेश्वर ने कहा था कोई भी अल्पसंख्यक या बिरयानी खिलाने वालों की सरकार नहीं
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हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, “अगर कोई कंकड़ फेंकेगा तो प्रशासन बहुत खतरनाक तरीके से प्रतिक्रिया देगा। यह बिरयानी खिलाने वालों की सरकार नहीं है, बल्कि शांति से राज करने वाली सरकार है। खूब नमाज पढ़ो, तीर्थ करो, आरती और हनुमान चालीसा गूंजे, लेकिन इसमें कोई बाधा डालेगा तो हनुमान जी का मुख खुल जाएगा और उसे कोई रोक नहीं पाएगा। ” वहीं इसी पूरे घटनाक्रम को अच्छे तरीके से हैंडल कर रहे डीसीपी उपयुक्त रियाज इकबाल को रातों-रात जोन 3 से हटा दिया गया और उन्हें अधीक्षक रेडियो बनाया गया। जबकि दो में मुस्लिम विधायकों एवं विधानसभाओं के बीच में मुस्लिम बहुल क्षेत्र रियाज इकबाल ने शांति स्थापित करने में हर संभव प्रयास करते रहें।
पुलिस ने कहा आरोपियों की मौजूदगी नहीं थी एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित ने प्रारंभिक जांच में पत्थरबाजी की घटना की पुष्टि होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि जिन आरोपियों के नाम एफआईआर में लिखवाए गए थे, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ में उनकी घटना स्थल पर मौजूदगी नहीं पाई गई। जबकि तीसरे आरोपी की अब तक पहचान ही नहीं हो पाई है अब सवाल यह उठता है कि जिन लोगों ने बवाल खड़ा किया क्या उन पर प्रकरण दर्ज करेंगे या केवल एक मजहब के लोगों को टारगेट लगातार किया जाता रहेगा।

