नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

साल के अंत तक महाराष्ट्र में होने जा रहे स्थानीय स्वराज संस्था चुनावों के लिए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के कारण महाविकास आघाड़ी की स्थिति मजबूत नज़र आ रही है। बीजेपी को निकायों में जितवाने की तरकीब जानने वाले मंत्री गिरीश महाजन उत्तर महाराष्ट्र के मालेगांव नासिक मनपा नंदुरबार जिप में कुछ खास प्रभाव छोड़ने नहीं जा रहे हैं। सुरेश जैन के बदौलत जलगांव मनपा कब्जे में रही भी तो बीजेपी को जिला परिषद की सत्ता से हाथ धोना पड़ेगा। महाजन के गृह नगर में दिलीप खोड़पे के चेहरे के दम पर विपक्ष ग्रामीण क्षेत्र में ठीकठाक है लेकिन जामनेर का वोटर टीम कांग्रेस पर खूब नाराज़ है। आठ साल पहले कांग्रेस गठबंधन के पांच नगर सेवकों के समर्थन से मंत्री महाजन की पत्नी साधना महाजन को ढाई साल के लिए नगर परिषद में अध्यक्षा बनाया गया।

बाद में हुए आम चुनाव में प्रो अंजली पवार को गठबंधन की ओर से संबल नहीं मिला। बीजेपी ने विकास के माध्यम से सत्ता के कुं(पूं) जीवाद का एक ऐसा सिस्टम खड़ा कर दिया है जिसका लाभ पा चुका धारक विपक्षी खेमे में भी आसानी से देखा जा सकता है। जामनेर तालुका एजुकेशन सोसायटी में वर्चस्व को लेकर राजनीत से प्रेरित कानूनी बखेड़ों से आम जनता को कोई लेना देना नहीं है। फिर भी MVA के शहरी नेता इसे चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के सामने अपना रोना रोते रहते हैं। सेक्युलर और धार्मिक विचार धारा के बीच की लड़ाई को उसी मोर्चे पर ईमानदारी से लड़ा गया तो चुनाव में रोचकता पैदा हो सकती है। लोकनियुक्त नगर अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण घोषित होने के बाद सीधे चुनाव नतीजे पर बात करी जा सकती है।

