पवन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

पहले के समय में आठ आठ दस दस बच्चे एक माता पिता के होते थे। आज के समय में एक बच्चा या अधिकतम दो बच्चों पर ही सिमट कर रह गए। उसमें भी परिवार का विघटन शुरू हो गया जिसे एकल परिवार कह सकते हैं। जब बच्चा एक होगा तो उसके न तो कोई चाची चाचा होगा और न कोई ताई ताऊ होगा। लड़की अकेली है तो उसके कोई मौसी मौसा होगा। यदि किसी के केवल लड़की है तो उसके भाभी भाई नहीं होंगे, न कोई भतीजी और भतीजे होंगे, यदि किसी के केवल एक लड़का है और लड़की नहीं है तो उस लड़के की कोई न तो बहिन होगी और न कोई बहनोई। बुआ फूफा भी नहीं होंगे।
तो फिर सोचो कितने रिश्ते खत्म होने की कगार पर हैं। मानो किसी के यहां हारी बीमारी हुई तो सहायता के लिए किसे बुलाएगा? एक लड़का होगा तो उससे क्या क्या करवा सकते हो? खेती कौन करेगा? दुकान कौन खोलेगा? देश की रक्षा करने किसे भेजोगे? बुढ़ापे में तुम्हारी सेवा कौन करेगा? देश की सेवा करने सीमा पर किसे भेजोगे। यदि एक लड़का है और उसे देश की सीमा पर भेज दिया और वो देश की रक्षा करते करते शहीद हो गया फिर आप किसके सहारे रहोगे? इसलिए देशहित में चार बच्चे तो पैदा करने ही चाहिए। पालन पोषण की जिम्मेदारी भगवान विष्णु ने ले रखी है वो सबका भरण पोषण करते हैं। हम आप तो केवल माध्यम हैं।

