नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

भारत के संघीय ढांचे में महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जिसे केंद्र सरकार ने सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझ रखा है। समूचे देश में सबसे महंगी बिजली बेचने वाले महाराष्ट्र की जनता महंगाई के करंट से मूर्छित होने की कगार पर है। तीन हिस्सों में बंटी ऊर्जा कंपनी ने बिजली के दरों में तीन महीने के भीतर 38% की भयानक बढ़ोतरी की है। अप्रैल 2024 में 8% और जून 2024 में एकदम 30% इस प्रकार से कुल 38% से बिजली महंगी कर दी गई है। जून के बिल बिना मीटर रीडिंग के कुछ इस प्रकार से आंके और हांके गए हैं की 100/150 अतिरिक्त यूनिट को ग्राहकों के ऊपर थोप दिया गया है। बिल का आंकलन करने पर प्रति यूनिट रेट के डेढ़ गुना टैक्सेस लगाकर बिल का पैसा जबरन बढ़ाया जा चुका है। आर्थिक संकटों के चक्र में फंसते जा रहे महाराष्ट्र में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को शिंदे-फडणवीस सरकार ने विधानसभा चुनावों तक ब्रेक लगाया है।

हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में बताया था कि स्मार्ट मीटर के नाम पर ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गौतम अदानी को 13 हजार 888 करोड़ का टेंडर जारी कर दिया है। सूबे में दो लाख स्मार्ट मीटर बिठाए जा चुके हैं। योजना को जनता के बीच से होने वाला तीव्र विरोध भांपकर मामला फ्रिज कर दिया गया। महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र शुरू है जिसमें फटती चादर बंटती खैरात जैसे शगूफों से समां बांधने वाला विपक्ष सरकारी बिजली विभाग द्वारा जनता की की जा रही लूट पर खामोश है। आज़ अगर सदन में भाजपा विपक्ष में होती तो सड़क पर कोहराम मचा देती। मन की बात सुनने वाली मीडिया जन की आवाज़ के लिए तांडव करती। कोरोना काल के दौरान सत्ता में रहे विपक्ष ने भी बिजली विभाग के माध्यम से गरीब मिडल क्लास का जो खून चूसा है उसे लोग भूले नहीं हैं। आम लोग जून 2024 के अतिरिक्त बिल कम करवाने के लिए बिजली बोर्ड के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, किसी की कोई सुनवाई नहीं। महंगी बिजली के शॉक से त्रस्त मतदाता इस मामले पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों से ठोस आश्वासन चाहते हैं।
